ग्रेटर नोएडा: बैंक में नौकरी करने वाली एक महिला कर्मचारी पर ऐसा गंभीर आरोप लगा है, जिसने बैंकिंग व्यवस्था की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा में ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी के मामले में CBI ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला नाम दीपांशी शर्मा का है, जो बीटेक पास होने के बावजूद बैंक में कार्यालय सहायक यानी सब-स्टाफ के पद पर कार्यरत थी।
आरोप है कि दीपांशी ने बैंक के छह अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग करके ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति पैसे ट्रांसफर किए। इस मामले में बैंक की प्रारंभिक जांच में लगभग 10.24 करोड़ रुपये की अनधिकृत निकासी सामने आई है। वहीं, कुछ खाताधारकों ने शुरुआत में करीब 35 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी का दावा किया था।
बीटेक पास दीपांशी कैसे बनी करोड़ों की हेराफेरी की आरोपी?
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, दीपांशी शर्मा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित बैंक शाखा में वर्ष 2021 से काम कर रही थी। उसकी शैक्षणिक योग्यता बीटेक बताई गई है, जबकि बैंक में उसकी तैनाती कार्यालय सहायक के रूप में थी।
आरोप है कि उसने बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों की यूजर आईडी तथा पासवर्ड की जानकारी हासिल कर ली थी। इसके बाद वह उनकी अनुपस्थिति में उनके कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल करके संदिग्ध लेनदेन करती थी।
बैंक की शिकायत में छह अधिकारियों की लॉगिन आईडी के दुरुपयोग का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन पासवर्ड का इस्तेमाल किस तरह हुआ और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें भूमिका थी।
जमीन मुआवजा पाने वाले किसानों के खाते थे निशाने पर
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि कथित तौर पर उन खाताधारकों को निशाना बनाया गया, जिन्हें जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजे की रकम मिली थी।
इनमें कई किसान और ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें बैंकिंग प्रक्रिया की तकनीकी जानकारी सीमित थी। आरोप है कि दीपांशी ऐसे ग्राहकों से संपर्क बनाए रखती थी और उन्हें अपना निजी मोबाइल नंबर भी देती थी।
जब कोई ग्राहक बैंक आने की बात करता था, तो वह कथित तौर पर पहले ही बैंक के बाहर पहुंच जाती थी। किसी न किसी बहाने से ग्राहकों को बैंक के अंदर जाने से रोकने की कोशिश करती थी।
इस तरीके से ग्राहकों को अपने खातों में हो रही संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने में देरी हो सकती थी। जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर कुछ खातों के मोबाइल ट्रांजेक्शन अलर्ट बंद किए गए थे।
छह अधिकारियों की ID से कैसे होता था पैसा ट्रांसफर?
बैंक की शिकायत के मुताबिक, दीपांशी ने छह अधिकारियों की लॉगिन जानकारी का कथित दुरुपयोग किया। इन आईडी के जरिए ग्राहकों के खातों से अनधिकृत डेबिट ट्रांजेक्शन किए गए।
आरोप है कि रकम को सीधे एक खाते में भेजने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता था। इस प्रक्रिया में आशुतोष कुमार पाठक सहित कई लोगों के खातों का इस्तेमाल होने की बात सामने आई है।
जांच में कुछ खाताधारकों के नाम भी सामने आए हैं, जिनमें प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी शामिल हैं। हालांकि, इन सभी लोगों की भूमिका और लेनदेन में उनकी जानकारी या संलिप्तता की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

49 फिक्स्ड डिपॉजिट में भी मिली गड़बड़ी
इस मामले में केवल बचत खातों से पैसे निकालने का आरोप नहीं है, बल्कि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में भी कथित अनियमितताएं सामने आई हैं।
बैंक की प्रारंभिक जांच के अनुसार, कुछ FD में आशुतोष पाठक और अन्य लोगों को संयुक्त खाताधारक के रूप में जोड़ा गया था। इसके बाद जमा योजनाओं से जुड़ी जानकारी में बदलाव करके कुछ FD समय से पहले बंद कराई गईं।
आरोप है कि FD की रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया। बैंक ने अपनी शिकायत के साथ 49 फिक्स्ड डिपॉजिट का विवरण भी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराया है।
इसके अलावा, लेनदेन से जुड़े कुछ वाउचर गायब होने और ग्राहकों को मोबाइल अलर्ट नहीं मिलने की बात भी जांच के दायरे में है।
एक ग्राहक की शिकायत से खुला पूरा मामला
इस कथित घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब एक महिला ग्राहक संगीता अपने पति और बेटी के साथ बैंक में पासबुक अपडेट कराने पहुंचीं।
पासबुक अपडेट होने पर उन्हें 16 सितंबर के तीन ऐसे ट्रांजेक्शन दिखाई दिए, जिनकी उन्होंने अनुमति नहीं दी थी।
उन्होंने बैंक अधिकारियों से इस संबंध में सवाल किया। आरोप है कि उस समय दीपांशी ने इन ट्रांजेक्शन को सही बताने की कोशिश की और रकम को प्रॉपर्टी में निवेश से जोड़कर समझाया।
लेकिन जब बैंक प्रबंधन ने संबंधित लेनदेन के दस्तावेज और वाउचर तलाशे, तो जरूरी रिकॉर्ड नहीं मिले। इसके बाद बैंक ने मामले की आंतरिक जांच शुरू की और संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आने लगी।
CBI ने दीपांशी और आशुतोष को किया गिरफ्तार
बैंक की शिकायत के आधार पर CBI ने 29 अक्टूबर 2026 को मामला दर्ज किया था। इसके बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई करते हुए दीपांशी शर्मा और उसके कथित सहयोगी आशुतोष कुमार पाठक को गिरफ्तार किया।
आशुतोष को महाराष्ट्र के पुणे से पकड़ा गया। उसे वहां की विशेष अदालत में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड हासिल की गई।
अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ग्राहकों के खातों से निकाली गई रकम किन-किन खातों में पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल थे।
क्या खाताधारकों को वापस मिलेगा उनका पैसा?
इस मामले में प्रभावित खाताधारकों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनकी जमा पूंजी की वापसी का है। कई लोगों ने अपनी जिंदगीभर की बचत और जमीन अधिग्रहण से मिले मुआवजे की रकम बैंक में जमा की थी।
खाताधारकों का नेतृत्व कर रहे एक प्रतिनिधि ने दावा किया है कि लगभग 70 प्रतिशत ग्राहकों की रकम वापस करने की बात कही गई है। हालांकि, कुछ ग्राहकों को KYC प्रक्रिया पूरी होने में देरी के कारण अपनी रकम इस्तेमाल करने में परेशानी हो रही है।
फिलहाल बैंक और जांच एजेंसियां मामले की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं। रकम की अंतिम स्थिति और प्रत्येक आरोपी की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


