
प्रकाश सिंह
लखनऊ levana fire : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का सबसे पॉश इलाका हजरतगंज, जहां से पूरे सूबे की बागडोर संभाली जाती है। कानून-व्यवस्था से लेकर नई नीतियों और योजनाओं को बनाने के बाद धरातल पर उतारने का फरमान जारी होता है। उसी राजधानी में नियमों को दरकिनार कर बड़े-बड़े होटल, अपार्टमेंट्स, अस्पताल, धर्मशाला, मैरिज हॉल, शॉपिंग मॉल चल रहे हैं। लेकिन इनपर एलडीए, नगर निगम और ढेर सारे विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। जब घटनाएं आम आदमी की जिंदगियों को अपना निवाला बना लेती हैं तो कार्रवाई के नाम पर अफसर सिर्फ नोटिस-नोटिस खेल लेते हैं। कुछ ऐसी ही लापरवाहियों का नतीजा रहा है कि, पिछले कुछ सालों में दर्जनों आम जिंदगियों को इन भ्रष्ट अफसरों की कार्यशैली ने छीन लिया।
बीते गुरुवार को हजरतगंज स्थित प्रिंस कॉम्पलेक्स बिल्डिंग के पहले तल पर स्थित 116 नंबर दुकान में चल रही वाटर प्यूरीफायर कंपनी के दफ्तर में आग लगी। देखते ही देखते आग दूसरी और तीसरी मंजिल पर पहुंच गई। इस दौरान करीब 80 लोग अंदर फंस गए। फायर ब्रिगेड और पुलिस ने मिलकर इन सभी को सुरक्षित खिड़की के रास्ते से बाहर निकाला। किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। लेकिन इस बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के सारे इंतजाम बीमार दिखाई दिए। पानी के लिए लगाए गए हौज पाइप में पानी नहीं आ रहा था। फायर अलॉर्म सिस्टम नहीं था। फायर एक्सटिंगुशर का सिलेंडर भी धूल फांक रहा था। वेंटीलेशन की कोई सुविधा नहीं दिखाई दी।
सबसे खतरनाक इमारतों में शामिल है प्रिंस कॉम्पलेक्स बिल्डिंग
साल 2008 में तत्कालीन सीएफओ अमन शर्मा ने शहर की सबसे खतरनाक इमारतों की जांच-पड़ताल कर एक रिपोर्ट तैयार की थी। जिसमें शहर की खतरनाक बिल्डिंग का नाम शामिल किया गया था। उस रिपोर्ट में प्रिंस कॉम्पलेक्स का भी नाम था। जिसमें आग की घटनाओं के मद्देनजर इस बिल्डिंग को खतरनाक घोषित किया गया था। बाद में अग्निशमन विभाग की तरफ से बिल्डिंग के प्रबंधन और वहां पर कारोबार करने वाले व्यापारियों को नोटिस जारी किया था। नोटिस मिलने के बाद भी व्यवस्थाओं को दुरुस्त न कराए जाने पर फायर विभाग ने बिल्डिंग को सील कर दिया था। बिल्डिंग सील होते ही व्यापारी वर्ग सड़क पर उतर गया और जमकर हंगामा किया। व्यापारियों के आक्रोश के चलते बिल्डिंग को दोबारा खोल दिया गया था, ये कहते हुए कि, फायर सेफ्टी के सभी जरूरी इंतजाम कराए जाएं। हालांकि बाद में कुछ इंतजाम जरूर किए गए। लेकिन देखरेख के अभाव में सारी व्यवस्थाएं फिर कूड़े में तब्दील हो गईं। कुछ समय बाद सीएफओ रहे अभय भान पांडेय ने भी बिल्डिंग का निरीक्षण किया और सुविधाएं सही नहीं होने पर नोटिस जारी किया। लेकिन इस नोटिस के बाद भी फायर सेफ्टी से जुड़ा कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया।
2018 में होटल विराट और एसएसजे में लगी थी आग
पिछले कुछ सालों में कई बड़ी घटनाएं हुईं, जिसमें दर्जनों लोगों की मौत हो गई। जांच के नाम पर खानापूर्ति हुई और कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। साल 2018 में 19 जून को चारबाग में स्थित होटल विराट और एसएसजे होटल में आग लगी थी। जिसमें सात लोगों की जलकर दर्दनाक मौत हो गई थी। होटल को मानकों के खिलाफ निर्माण कराए जाने को लेकर सील कर दिया गया था। लेकिन बाद में अधिकारियों की मिलीभगत से दोबारा शुरू हो गया।
लेवाना अग्निकांड में हुई थी चार लोगों की मौत
पांच सिंतबर 2022 को हजरतगंज स्थित लेवाना सुइट्स होटल में आग लगी। इस अग्निकांड में चार लोगों की जलकर मौत हो गई थी। होटल के मालिक को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा एलडीए की तरफ से एक कमेटी का गठन कर जांच के आदेश दिए गए। जिसकी अध्यक्षता एलडीए के सचिव पवन कुमार गंगवार कर रहे थे। एलडीए ने 22 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। लेकिन उसमें भी खेल किया गया और जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश हुई। होटल की जमीन को आवासीय दिखाकर उसपर व्यावसायिक निर्माण कराया गया। इसके अलावा कई विभागों से एनओसी तक नहीं ली गई। फायर सेफ्टी के कोई भी इंतजाम नहीं किए गए थे। जांच के बाद होटल को सील कर दिया गया था। वहीं लेवाना अग्निकांड पर सरकार की तरफ से कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे से पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि, जिन इमारतों को फायर सिस्टम न होने पर नोटिस जारी किया गया था उसमें क्या कार्रवाई हुई? जिसके जवाब से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ। लेवाना अग्निकांड के महज कुछ दिन बाद शाहनजफ रोड पर संचालित कोचिंग में भीषण आग लगी। जिसमें तमाम बच्चे फंस गए थे। अग्निकांड के बाद छह सितंबर को कोचिंग की बिल्डिंग को सील कर दिया गया था। लेकिन कुछ दिनों बाद ही बिल्डिंग खुल गई और कोचिंग शुरू हो गई। 12 अप्रैल 2022 को गोमतीनगर के विभूतिखंड में स्थित सेवी ग्रैंड होटल में भीषण आग लगी थी। जिसमें होटल में काम करने वाले कर्मचारी समेत 100 लोग फंस गए थे। ये होटल भी बिना फायर एनओसी के संचालित किया जा रहा था। ऐशबाग में अवैध तरीके से संचालित की जा रही आरा मशीन में आग लगी। जिसमें एक मजदूर की जलकर मौत हो गई थी। ऐसी तमाम आगजनी की घटनाएं हुईं हैं जिसमें जान-माल की हानि हुई। उसके बाद भी शासन से लेकर प्रशासन तक कार्रवाई के बजाय आंख मूंदकर अगली घटना का इंतजार करने लगता है।