लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ गुरुवार को उस समय राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई, जब समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने छात्रसंघ चुनाव समेत कई मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई, कई प्रदर्शनकारी बसों की छतों पर चढ़ गए और कुछ कार्यकर्ता फांसी का फंदा लेकर विरोध जताते नजर आए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों के जरिए ईको गार्डन भेज दिया।
यह प्रदर्शन दोपहर करीब 2 बजे गोमतीनगर स्थित 1090 चौराहे पर शुरू हुआ, जहां बड़ी संख्या में समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ता पार्टी के झंडे, बैनर और मांगों से जुड़े पोस्टर लेकर पहुंचे। प्रशासन ने पहले से बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल की तैनाती कर रखी थी।
पुलिस से हुई तीखी नोकझोंक
जैसे ही प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की देखने को मिली। कई कार्यकर्ता बैरिकेड पार करने की कोशिश करने लगे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मी उठाकर और घसीटकर बसों तक ले गए। वहीं कुछ कार्यकर्ता बसों की छत पर चढ़कर सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। बाद में पुलिस ने उन्हें भी नीचे उतारकर बसों में बैठाया और सभी को ईको गार्डन भेज दिया।
फांसी का फंदा लेकर पहुंचे कार्यकर्ता
प्रदर्शन में शामिल कुछ कार्यकर्ता अपने हाथों में प्रतीकात्मक फांसी का फंदा लेकर पहुंचे। उनका कहना था कि छात्र हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है और सरकार उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
हालांकि प्रदर्शन के दौरान किसी गंभीर हिंसा की सूचना नहीं मिली, लेकिन पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

‘कलियुग के कन्हैया’ वाला बयान बना चर्चा का विषय
प्रदर्शन के दौरान बस्ती से आए एक समाजवादी कार्यकर्ता ने अपने सीने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का टैटू दिखाते हुए उन्हें “कलियुग के कन्हैया” बताया।
उन्होंने दावा किया कि छात्र और युवा वर्ग समाजवादी पार्टी के साथ खड़ा है तथा सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल होने लगा और राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन गया।
क्या थीं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें?
समाजवादी छात्र सभा ने प्रदर्शन के दौरान कई मांगें सरकार के सामने रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
- प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में जल्द छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं।
- पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
- छात्रों पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग बंद किया जाए।
- हर वर्ष होने वाली फीस वृद्धि रोकी जाए।
- गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए सस्ती और सुलभ शिक्षा सुनिश्चित की जाए।
- विश्वविद्यालयों में निष्कासन की कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए।
- जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े छात्र हितों के लंबित मामलों का समाधान किया जाए।
- शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
सपा नेताओं ने सरकार पर लगाए आरोप
प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव जय सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार छात्रों और युवाओं की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और प्रदर्शनकारियों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांग कार्यकर्ताओं के साथ भी पुलिस का व्यवहार संवेदनशील नहीं रहा, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पुलिस की रही कड़ी निगरानी
1090 चौराहे और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन ने यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर बैरिकेडिंग की थी।
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद भी पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए रही ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को बाद में निर्धारित प्रक्रिया के तहत ईको गार्डन भेजा गया।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। विपक्ष सरकार पर छात्रों की अनदेखी का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शिक्षा सुधार के अपने प्रयासों का दावा कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में छात्र राजनीति और शिक्षा से जुड़े मुद्दे प्रदेश की राजनीति में और अधिक प्रमुखता से उभर सकते हैं।


