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चीनी के दाम अचानक ₹65 के पार! सरकार ने एथेनॉल को बताया बेगुनाह, फिर किस वजह से महंगी हुई शक्कर?

नई दिल्ली। देश में महंगाई के बीच अब चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। चाय से लेकर मिठाई, बेकरी और कई रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं में इस्तेमाल होने वाली चीनी के दाम में पिछले कुछ समय में तेजी देखने को मिली है। हालांकि, कीमतों में इस बढ़ोतरी के बीच सोशल मीडिया पर एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था।

अब केंद्र सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी को एथेनॉल से जोड़ना सही नहीं है। सरकार का कहना है कि कीमतों में तेजी के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं।

एक महीने में कितना बढ़ा चीनी का भाव?

उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 20 अगस्त तक देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹55.70 प्रति किलोग्राम पहुंच गई थी। एक महीने पहले यही कीमत लगभग ₹48.18 प्रति किलोग्राम बताई गई थी।

यानी करीब एक महीने के दौरान औसत खुदरा कीमत में लगभग ₹7.52 प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।

कीमतों में इस तेजी का असर केवल सीधे चीनी खरीदने वाले उपभोक्ताओं पर ही नहीं पड़ सकता, बल्कि चीनी से तैयार होने वाले कई खाद्य उत्पादों की लागत पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

क्या एथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी?

चीनी की कीमत बढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से सामने आया कि गन्ने का ज्यादा इस्तेमाल एथेनॉल बनाने के लिए किया जा रहा है। इससे चीनी का उत्पादन कम हुआ और बाजार में कीमतें बढ़ गईं।

हालांकि, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने इस दावे को खारिज किया है।

मंत्रालय के मुताबिक हालिया कीमत वृद्धि को एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन से जोड़ना सही नहीं है। सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति को समझने के लिए चीनी उत्पादन, मांग, मौसम, वैश्विक बाजार और बाजार व्यवहार जैसे कई पहलुओं को देखना होगा।

फिर आखिर क्यों बढ़ी चीनी की कीमत?

सरकार ने चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण बताए हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण घरेलू चीनी उत्पादन का अनुमान से कम रहना बताया गया है।

अगर घरेलू उत्पादन अनुमान के मुकाबले कम रहता है तो बाजार में उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ सकता है।

इसके अलावा त्योहारी सीजन से पहले चीनी की मांग में बढ़ोतरी भी कीमतों को प्रभावित कर सकती है। भारत में त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ती है, जिससे चीनी की खपत भी बढ़ सकती है।

मौसम ने भी बढ़ाई मुश्किल

सरकार ने मौसम से जुड़े कारणों को भी चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की वजहों में शामिल किया है। गन्ने की फसल पर मौसम का सीधा असर पड़ता है।

अगर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण गन्ने की पैदावार या उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो चीनी उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। उत्पादन और बाजार में उपलब्धता के बीच संतुलन बिगड़ने पर कीमतों में तेजी आने की संभावना रहती है।

वैश्विक बाजार का भी असर

भारत में चीनी की कीमतों को केवल घरेलू परिस्थितियों से नहीं देखा जा सकता। वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी भी घरेलू बाजार को प्रभावित कर सकती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पादन और आपूर्ति की स्थिति बदलने पर कीमतों का दबाव बढ़ सकता है। सरकार ने भी मौजूदा तेजी के कारणों में वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी को शामिल किया है।

जमाखोरी और सट्टेबाजी पर भी नजर

मंत्रालय ने उद्योग के कुछ वर्गों की ओर से सट्टेबाजी और जमाखोरी को भी कीमतों में तेजी के संभावित कारणों में गिनाया है।

अगर बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के बावजूद उसकी उपलब्धता को सीमित किया जाता है, तो कृत्रिम कमी जैसी स्थिति बन सकती है। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

इसी वजह से सरकार ने चीनी के भंडार की सीमा को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं, ताकि बाजार में उपलब्धता बनी रहे और अनावश्यक कीमत वृद्धि पर रोक लगाई जा सके।

सरकार ने उठाए कई कदम

चीनी की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सरकार ने पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों में स्थिरता लाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

इनमें चीनी के स्टॉक की निगरानी और ट्रेड फ्री आयात की अनुमति जैसे उपाय शामिल हैं। इन कदमों का उद्देश्य बाजार में आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सरकार का कहना है कि वह चीनी की उपलब्धता और कीमतों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। आने वाले समय में घरेलू उत्पादन, त्योहारी मांग, वैश्विक आपूर्ति और बाजार में उपलब्ध स्टॉक की स्थिति यह तय करेगी कि चीनी के दाम किस दिशा में जाते हैं।

उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह होगी कि यदि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रहती है और जमाखोरी पर प्रभावी नियंत्रण होता है, तो कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद की जा सकती है।

चीनी के दाम बढ़ने की वजह सिर्फ एथेनॉल नहीं है। केंद्र सरकार ने एथेनॉल से जुड़ी वजह को खारिज करते हुए कम घरेलू उत्पादन, त्योहारी मांग, मौसम से फसल को नुकसान, वैश्विक आपूर्ति में कमी और संभावित जमाखोरी-सट्टेबाजी को कीमतों में तेजी के प्रमुख कारणों में बताया है। अब सरकार के स्टॉक नियंत्रण और आयात संबंधी कदमों से बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर कितना असर पड़ता है, इस पर नजर रहेगी।

News Desk

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