नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ यानी DUSU चुनाव 2026 में शुक्रवार को मतदान जारी है, लेकिन इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश ने चुनावी माहौल को नया मोड़ दे दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि 19 सितंबर को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कोई भी उम्मीदवार, छात्र या समर्थक विजय जुलूस नहीं निकाल सकेगा। यह रोक केवल दिल्ली की सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज कैंपस और हॉस्टल में भी लागू होगी। नियम तोड़ने वालों पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी हो सकती है।
हाईकोर्ट का यह सख्त रुख चुनाव प्रचार के दौरान सामने आए कथित हिंसा, वाहनों के काफिले, बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों और अन्य चुनावी नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद आया है। कोर्ट ने सभी छात्र संगठनों और चुनाव लड़ रहे 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि चुनावी नियमों तथा अदालत के निर्देशों के कथित उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ सामूहिक चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए।
वोटिंग के दिन DU में कैसी है व्यवस्था?
DUSU चुनाव के लिए 18 सितंबर को दो चरणों में मतदान हो रहा है। दिन की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक, जबकि शाम की कक्षाओं वाले छात्र दोपहर 3 बजे से शाम 7:30 बजे तक वोट डाल सकते हैं। वोटों की गिनती 19 सितंबर को होगी।
चुनाव को देखते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, करीब 900 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, जिसमें दिल्ली पुलिस और सात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कंपनियां शामिल हैं। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी की जा रही है।
140 उम्मीदवारों को क्यों मिला नोटिस?
हाईकोर्ट ने चुनावी नियमों के कथित उल्लंघन को गंभीरता से लिया है। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने चुनाव प्रचार के दौरान वाहनों के बड़े काफिलों, बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों और कथित हिंसा से जुड़ी जानकारी रखी गई।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि चुनाव से संबंधित कार्रवाई में 49 वाहन जब्त किए गए, 5,400 से अधिक चालान किए गए और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। अदालत ने कहा कि चुनाव के दौरान बार-बार नियमों के उल्लंघन की स्थिति को हर संभव तरीके से रोकना जरूरी है।
कोर्ट ने छात्र संगठनों और उम्मीदवारों को सामूहिक रूप से जिम्मेदार ठहराए जाने की संभावना भी जताई है। यानी मामला केवल किसी एक उम्मीदवार की कथित गलती तक सीमित नहीं रहने वाला है।
विजय जुलूस पर पूरी तरह रोक क्यों?
दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले अनुभवों और चुनाव प्रचार के दौरान सामने आई घटनाओं को देखते हुए परिणाम के बाद विजय जुलूस पर रोक लगाई है।
अदालत के निर्देश के मुताबिक, परिणाम घोषित होने के बाद सड़क पर ही नहीं, बल्कि कॉलेज कैंपस और हॉस्टल में भी विजय जुलूस नहीं निकाला जा सकेगा। इस आदेश को लागू कराने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस को दी गई है। उल्लंघन होने पर संबंधित उम्मीदवार, छात्र, समर्थक या अन्य व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है। इसे अदालत की अवमानना भी माना जा सकता है।

चुनाव प्रचार में काफिलों और हिंसा का मुद्दा
DUSU चुनाव से पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनावी माहौल में कथित हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों पर चिंता जताई थी। 17 सितंबर को कोर्ट ने कहा था कि यदि दिल्ली यूनिवर्सिटी और पुलिस की रिपोर्ट से अदालत संतुष्ट नहीं हुई तो वोटों की गिनती रोकने और परिणाम टालने पर भी विचार किया जा सकता है।
इससे पहले चुनाव प्रचार के दौरान छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए। प्रचार के अंतिम दिनों में पोस्टर-पर्चों, वाहनों के काफिलों और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए उम्मीदवारों ने छात्रों तक पहुंच बनाने की कोशिश की।
इस बार किन मुद्दों पर हुआ चुनाव?
इस बार DUSU चुनाव में सिर्फ छात्र राजनीति ही नहीं, बल्कि छात्र सुरक्षा, हॉस्टल, किराया और बेहतर आवास जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहे हैं।
6 सितंबर को दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत गिरने की घटना में पांच DU छात्रों समेत सात लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद छात्र संगठनों के अभियानों में सुरक्षित और किफायती छात्र आवास का मुद्दा प्रमुखता से उठा।
DU में हॉस्टल की उपलब्धता भी एक बड़ा मुद्दा है। रिपोर्ट के मुताबिक विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में करीब 3,422 सीटें और संबद्ध कॉलेजों में करीब 3,788 सीटें हैं, जबकि विश्वविद्यालय में हर साल बड़ी संख्या में छात्र दाखिला लेते हैं।
ABVP, NSUI और AISA-SFI के उम्मीदवार
2026 के DUSU चुनाव में चार केंद्रीय पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—के लिए कुल 20 उम्मीदवार मैदान में हैं। प्रमुख छात्र संगठनों में ABVP, NSUI और AISA-SFI गठबंधन शामिल हैं।
अध्यक्ष पद पर ABVP ने यश डबास, जबकि NSUI ने विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया है। AISA-SFI की ओर से अनन्या रतूड़ी उम्मीदवार हैं। उपाध्यक्ष पद पर ABVP के ईशू मौर्य, NSUI के वीर चतरथ और AISA-SFI के अक्षत शिखर समेत अन्य उम्मीदवार मैदान में हैं।
DUSU की राजनीतिक विरासत भी लंबी
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ लंबे समय से छात्र राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में जाने वाले नेताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच रहा है। अतीत में अरुण जेटली और विजय गोयल जैसे नेता DUSU से जुड़े रहे हैं। ऐसे में हर साल होने वाला यह चुनाव विश्वविद्यालय परिसर से बाहर भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बनता है।
अब 19 सितंबर पर रहेगी नजर
शुक्रवार को मतदान पूरा होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को सील कर सुरक्षित रखा जाएगा और शनिवार को मतगणना होगी। इस बार परिणाम घोषित होने से पहले ही हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जीत के बाद जश्न के नाम पर जुलूस या काफिला निकालने की अनुमति नहीं होगी।
इस आदेश के बाद 19 सितंबर को परिणाम आने के दौरान पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। अदालत ने पहले ही उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है।


