उत्तर प्रदेश: विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस सीट शेयरिंग का मुद्दा गठबंधन की राजनीति में अहम हो गया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही अगले विधानसभा चुनाव में साथ रहने की बात कह चुके हैं, लेकिन किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी, इस पर अभी औपचारिक समझौता नहीं हुआ है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस ने 403 विधानसभा सीटों में से 150 सीटों को अपनी प्राथमिक दावेदारी के तौर पर चिह्नित किया है। पार्टी के सूत्रों के अनुसार अंतिम संख्या बातचीत के दौरान बदल सकती है, लेकिन कांग्रेस 100 से कम सीटों पर समझौता नहीं करना चाहती। दूसरी ओर, सपा की तरफ से सीट बंटवारे में संबंधित सीट पर जीत की संभावना को महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।
403 सीटों पर कैसे फंसा है मामला?
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। ऐसे में सीटों का बंटवारा दोनों दलों के लिए केवल संख्या का सवाल नहीं है, बल्कि यह तय करना भी महत्वपूर्ण होगा कि किन विधानसभा क्षेत्रों में कौन उम्मीदवार उतारेगा।
कांग्रेस ने अपनी तैयारियों के तहत विधानसभा क्षेत्रों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर संभावित सीटों की पहचान शुरू की है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उसकी पहली श्रेणी में 150 सीटें रखी गई हैं, जिन पर वह गठबंधन वार्ता में दावा कर सकती है।
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी भी संगठन और उम्मीदवारों की तैयारी के स्तर पर पीछे नहीं रहना चाहती। रिपोर्टों में सामने आया है कि सपा ने सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी तैयारी जारी रखी है।
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 25 सितंबर को रायबरेली में PDA रथ यात्रा के दौरान गठबंधन को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस का चुनावी साथ जारी रहेगा, लेकिन सीटों का बंटवारा जीतने की क्षमता यानी winnability को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
इसका अर्थ यह है कि सीटों को केवल बराबर संख्या या पुराने फॉर्मूले के आधार पर बांटने के बजाय दोनों दल संबंधित विधानसभा क्षेत्र में अपनी स्थिति को भी बातचीत का हिस्सा बना सकते हैं।
हालांकि, यह अभी सीटों के अंतिम बंटवारे का फॉर्मूला नहीं है। औपचारिक बातचीत के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों दल किन सीटों पर सहमत होते हैं।
कांग्रेस की 150 सीटों की दावेदारी क्यों महत्वपूर्ण?
कांग्रेस की ओर से 150 सीटों की दावेदारी सामने आने के बाद सीट शेयरिंग का गणित और महत्वपूर्ण हो गया है। पार्टी ने अपनी तैयारियों के लिए 403 सीटों का अध्ययन किया है और संभावित उम्मीदवारों तथा संगठन की स्थिति के आधार पर सीटों को वर्गीकृत किया है।
सितंबर की रिपोर्टों में कांग्रेस की ओर से 150 से 200 सीटों तक की दावेदारी की बात भी सामने आई थी। साथ ही पार्टी सभी 403 सीटों पर संगठनात्मक तैयारी कर रही है, ताकि गठबंधन की बातचीत में उसकी स्थिति कमजोर न हो। यह संख्या पार्टी सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों में बताई गई दावेदारी है, अंतिम सीट समझौता नहीं।
क्या सपा-कांग्रेस के बीच औपचारिक बातचीत शुरू हो गई है?
यहीं मौजूदा स्थिति सबसे महत्वपूर्ण है।
26 सितंबर तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई थी और 2024 लोकसभा चुनाव की तरह कोई समन्वय समिति भी गठित नहीं की गई थी।
हालांकि, 26 सितंबर की कुछ रिपोर्टों में यह जानकारी सामने आई कि औपचारिक बातचीत अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है और कांग्रेस ने अपनी प्राथमिक सीटों की सूची तैयार कर ली है। इसलिए फिलहाल बातचीत की दिशा और समय को लेकर मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण मौजूद हैं। अंतिम आधिकारिक समझौता सामने आने तक इन दावों को संभावित प्रक्रिया के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

2017 और 2024 का संदर्भ क्यों आ रहा है?
सपा और कांग्रेस पहले भी उत्तर प्रदेश में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत मैदान में उतरी थीं।
मौजूदा सीट बंटवारे की चर्चा में कांग्रेस की ओर से पुराने गठबंधन के आंकड़ों और 2024 के लोकसभा प्रदर्शन को आधार के तौर पर सामने रखा जा रहा है। वहीं सपा की ओर से मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति और जीत की संभावना को महत्व दिए जाने की बात सामने आई है।
इसलिए आने वाली बातचीत में पुराने फॉर्मूले के साथ-साथ मौजूदा राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति भी चर्चा का हिस्सा हो सकती है।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव की भूमिका
सीट शेयरिंग का अंतिम फैसला दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही होने की संभावना है। रिपोर्टों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के स्तर पर बातचीत की संभावना का उल्लेख किया गया है।
25 सितंबर की एक रिपोर्ट में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव के बीच अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में दिल्ली में संभावित बैठक की बात सामने आई थी। हालांकि, ऐसी बैठक को अंतिम सीट समझौते के बराबर नहीं माना जा सकता।
गठबंधन के सामने मुख्य सवाल क्या हैं?
इस समय तीन बड़े सवाल सामने हैं।
पहला, कांग्रेस को 403 में से कितनी सीटें मिलेंगी।
दूसरा, किन सीटों पर दोनों दलों की दावेदारी टकराएगी और वहां किसे उम्मीदवार उतारने का मौका मिलेगा।
तीसरा, सीट बंटवारे की बातचीत पूरी होने से पहले दोनों दल अपने-अपने संगठन और संभावित उम्मीदवारों की तैयारी किस स्तर तक जारी रखेंगे।
सपा और कांग्रेस दोनों की ओर से फिलहाल साथ चुनाव लड़ने की बात सामने आई है, लेकिन सीटों का अंतिम बंटवारा अभी तय नहीं हुआ है।
आगे क्या होगा?
अगले चरण में दोनों दल सीटों की सूची, संभावित उम्मीदवारों और संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की स्थिति पर बातचीत कर सकते हैं। कांग्रेस ने अपनी ओर से सीटों की प्राथमिक सूची तैयार करने का दावा किया है, जबकि सपा की ओर से जीत की संभावना को आधार बनाने की बात कही गई है।
इसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत तेज होने की संभावना है, लेकिन अभी यह कहना सही नहीं होगा कि गठबंधन का अंतिम फॉर्मूला तय हो चुका है।


