नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए जंतर-मंतर से लेकर संसद मार्ग तक सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाने के साथ संवेदनशील इलाकों में ड्रोन के जरिए भी निगरानी की जा रही है।
पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक संगठनों की ओर से इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन और उनके पद से हटाने की मांग लगातार तेज हो रही है।
कल के प्रदर्शन के बाद आज फिर तनाव की आशंका
मंगलवार को राजधानी में विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। इस दौरान संसद परिसर से आगे बढ़े नेताओं को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने काफी देर तक मौके पर धरना दिया और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में राहुल गांधी समेत कई नेताओं को पुलिस हिरासत में लिया गया।
इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन को आशंका है कि बुधवार को भी विरोध प्रदर्शन हो सकता है। यही वजह है कि जंतर-मंतर, संसद मार्ग और चुनाव आयोग की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा का घेरा और मजबूत किया गया है।
तीन स्तर की बैरिकेडिंग, ड्रोन से निगरानी
सुरक्षा व्यवस्था के तहत संवेदनशील रास्तों पर कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई है। प्रदर्शनकारियों को संसद भवन की दिशा में आगे बढ़ने से रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जरूरत पड़ने पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और दंगा नियंत्रण वाहनों को भी तैयार रखा गया है।
पुलिस की नजर सिर्फ जमीन पर ही नहीं बल्कि आसमान से भी रहेगी। ड्रोन कैमरों के जरिए भीड़ की गतिविधियों और संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जा रही है। इससे किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से तत्काल निपटने की कोशिश की जा रही है।

आखिर क्यों हो रहा है ज्ञानेश कुमार का विरोध?
इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का Special Intensive Revision (SIR) है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और नामों की जांच की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। विपक्षी नेता इसे चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकार से जोड़कर देख रहे हैं।
वहीं चुनाव आयोग की ओर से SIR को मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया के रूप में पेश किया गया है। आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची में मौजूद गलत, डुप्लीकेट या अपात्र प्रविष्टियों को हटाना चुनावी व्यवस्था की शुचिता के लिए जरूरी है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार बढ़ रहे हैं।
विपक्ष की मांग क्या है?
विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए और मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
मंगलवार के प्रदर्शन में कई विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए। मार्च को चुनाव आयोग के कार्यालय तक ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस ने संसद मार्ग के आसपास बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया। इसके बाद काफी देर तक मौके पर राजनीतिक नारेबाजी और धरना चलता रहा।
चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बढ़ा टकराव
प्रदर्शन के बीच विपक्षी सांसदों और चुनाव आयोग के बीच मुलाकात को लेकर भी विवाद सामने आया। आयोग की ओर से कहा गया कि सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने संसद भवन परिसर में मुलाकात की इच्छा जताई थी, जबकि आयोग के अनुसार सामान्य प्रक्रिया में ऐसी मुलाकात उसके कार्यालय परिसर में होती है।
इस घटनाक्रम ने राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है। एक ओर विपक्ष सड़क पर उतरकर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रहा है।
जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक क्यों महत्वपूर्ण है इलाका?
जंतर-मंतर दिल्ली में लंबे समय से विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। वहीं संसद मार्ग और उसके आसपास का इलाका देश की राजनीतिक गतिविधियों का बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में किसी बड़े प्रदर्शन के संसद की ओर बढ़ने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क हैं।
प्रशासन की कोशिश है कि प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्रों से आगे बढ़ने से रोका जाए और संसद तथा अन्य महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
आज क्या हो सकता है?
बुधवार को प्रदर्शन की स्थिति पर सभी की नजर रहेगी। यदि प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में जुटते हैं तो दिल्ली के मध्य हिस्से में यातायात और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना भी बनी हुई है। पुलिस पहले से बैरिकेडिंग, अतिरिक्त बल और निगरानी व्यवस्था के जरिए स्थिति को नियंत्रित रखने की तैयारी में है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ेगा या फिर एक बार फिर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनेगी। चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होता है या राजनीतिक बातचीत से रास्ता निकलता है, इस पर अब सबकी नजर है।


