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दिल्ली में पुलिस हिरासत में अभिजीत दीपके, तभी आई दादी के निधन की खबर; अंतिम संस्कार में शामिल होने पर सवाल

नई दिल्ली/हिंगोली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के लिए शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 का दिन बेहद मुश्किल भरी खबर लेकर आया। एक ओर वह दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए राजधानी पहुंचे, लेकिन विमान उतरते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। दूसरी ओर, महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में उनके पैतृक गांव संतुक पिंपरी में उनकी दादी सावित्रीबाई दीपके का निधन हो गया। इस घटनाक्रम के बाद परिवार में शोक का माहौल है और यह सवाल उठ रहा है कि अभिजीत दीपके अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गांव लौट पाएंगे या नहीं।

सावित्रीबाई दीपके पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं। शनिवार सुबह उनके निधन की खबर सामने आई। उसी दौरान अभिजीत दीपके दिल्ली में पुलिस हिरासत में थे। फिलहाल उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र लौटने की अनुमति या उनकी रिहाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इस कारण परिवार के लिए यह समय और भी कठिन हो गया है।

दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचते ही पुलिस ने क्यों लिया हिरासत में?

अभिजीत दीपके मुंबई से विमान के जरिए दिल्ली पहुंचे थे। CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही थी। इसी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दीपके और पार्टी के अन्य नेता राजधानी पहुंचे थे।

विमान के दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के कुछ ही समय बाद पुलिसकर्मी विमान के भीतर पहुंचे और अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया। उनके साथ पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। इस कार्रवाई के दौरान विमान में अन्य यात्री भी मौजूद थे।

हिरासत में लिए जाने से पहले अभिजीत दीपके ने पुलिसकर्मियों से कहा कि वह प्रदर्शन के लिए आए हैं और गिरफ्तारी से डरते नहीं हैं। घटनास्थल से सामने आए वीडियो में उन्हें पुलिस से बातचीत करते हुए देखा गया। CJP ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने को अनुचित बताया।

दादी सावित्रीबाई दीपके का निधन, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

अभिजीत दीपके की दादी सावित्रीबाई दीपके का महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव में निधन हुआ। वह पिछले कुछ समय से बीमार थीं और उम्र संबंधी परेशानियों से भी जूझ रही थीं। शनिवार सुबह उनके निधन की खबर सामने आई, जिसके बाद परिवार और गांव में शोक की स्थिति बन गई।

दादी के निधन के समय अभिजीत दीपके दिल्ली में पुलिस हिरासत में थे। ऐसे में परिवार के सामने अंतिम संस्कार की तैयारियों के साथ-साथ यह चिंता भी थी कि वह अपने घर पहुंच पाएंगे या नहीं। परिवार के सदस्यों के महाराष्ट्र लौटने की खबर सामने आई, लेकिन दीपके की रिहाई और यात्रा को लेकर तत्काल स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

यह घटना ऐसे समय हुई, जब दीपके राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर पहले से ही चर्चा में थे। अब उनके परिवार में हुई इस दुखद घटना ने पूरे घटनाक्रम को एक भावनात्मक मोड़ दे दिया है।

CJP के प्रदर्शन का क्या था मुद्दा?

कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही थी। CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए थे।

पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल हैं और इस मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इन्हीं मुद्दों को लेकर संगठन ने राजधानी में प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी।

दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका वाले कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। पुलिस की कार्रवाई को लेकर CJP ने विरोध जताया और अपने नेताओं की रिहाई की मांग की।

हालांकि, मतदाता सूची को लेकर लगाए गए आरोप पार्टी के दावे हैं। इन आरोपों को स्थापित तथ्य मानने के बजाय संबंधित अधिकारियों के जवाब और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर देखना जरूरी है।

क्या अभिजीत दीपके अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल हो पाएंगे?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभिजीत दीपके को अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र जाने का अवसर मिलेगा या नहीं। उनके परिवार के लिए यह बेहद भावनात्मक समय है, क्योंकि दादी के निधन की खबर ऐसे वक्त आई, जब वह राजधानी में पुलिस हिरासत में थे।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके माता-पिता महाराष्ट्र में अंतिम संस्कार के लिए रवाना होने की तैयारी में थे। दूसरी ओर, अभिजीत दीपके की रिहाई और गांव लौटने की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि पुलिस हिरासत में लिए जाने का अर्थ अपने आप में औपचारिक गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत नहीं होता। दीपके को किस आधार पर और कितनी देर तक हिरासत में रखा गया, इस संबंध में आधिकारिक जानकारी के बिना किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

परिवार के लिए सबसे अहम सवाल अब यही है कि वह अंतिम संस्कार में शामिल हो सकेंगे या नहीं। इस संबंध में किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि होने तक स्थिति को अनिश्चित ही माना जाना चाहिए।

News Desk

Written by News Desk

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