हेल्थ डेस्क: किडनी में पथरी होने का दर्द झेल चुके लोग अच्छी तरह जानते हैं कि यह परेशानी कितनी तकलीफदेह हो सकती है। कई मरीज इलाज या सर्जरी के बाद राहत महसूस करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें फिर से पथरी होने की जानकारी मिलती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गुर्दे में पथरी बार-बार क्यों बनती है? क्या इससे बचने का कोई तरीका है और क्या हर बार ऑपरेशन कराना जरूरी होता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, किडनी स्टोन का इलाज केवल पथरी निकालने तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को बार-बार पथरी हो रही है, तो उसके पीछे मौजूद कारणों की पहचान करना भी जरूरी है। कम पानी पीना, खानपान में अधिक नमक, कुछ मेटाबॉलिक समस्याएं और पारिवारिक इतिहास इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
आखिर किडनी में बार-बार पथरी क्यों बनती है?
किडनी खून को फिल्टर करके शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती है। जब पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सलेट या यूरिक एसिड जैसे पदार्थों की मात्रा अधिक हो जाती है और तरल पदार्थ पर्याप्त नहीं होता, तो छोटे-छोटे क्रिस्टल बनने लग सकते हैं। समय के साथ ये क्रिस्टल आपस में जुड़कर पथरी का रूप ले सकते हैं।
बार-बार पथरी बनने के कुछ प्रमुख कारण हैं:
1. पर्याप्त पानी नहीं पीना: शरीर में पानी की कमी होने से पेशाब गाढ़ा हो सकता है। इससे पथरी बनाने वाले खनिजों के क्रिस्टल बनने का जोखिम बढ़ जाता है। गर्मी में अधिक पसीना निकलना भी इस समस्या में योगदान दे सकता है।
2. खाने में ज्यादा नमक: जरूरत से ज्यादा नमक खाने से पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है। पैकेटबंद स्नैक्स, नमकीन, अचार और अत्यधिक नमक वाले भोजन को सीमित रखना उपयोगी हो सकता है।
3. खानपान में असंतुलन: बहुत ज्यादा पशु प्रोटीन और कुछ लोगों में ऑक्सलेट युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन पथरी के जोखिम को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, सभी लोगों को एक जैसी चीजें बंद करने की जरूरत नहीं होती। आहार में बदलाव पथरी के प्रकार और डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना चाहिए।
4. कुछ बीमारियां: गाउट, डायबिटीज, पैराथायरॉयड ग्रंथि से जुड़ी समस्या और कुछ आंतों की बीमारियां भी बार-बार पथरी बनने की आशंका बढ़ा सकती हैं।
5. आनुवंशिक कारण: यदि परिवार में माता-पिता या भाई-बहनों को पथरी की समस्या रही है, तो कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है।

क्या हर बार पथरी होने पर ऑपरेशन जरूरी है?
नहीं, हर किडनी स्टोन में सर्जरी जरूरी नहीं होती। इलाज का फैसला पथरी के आकार, उसके स्थान, पेशाब के रास्ते में रुकावट, संक्रमण और मरीज की समग्र स्थिति को देखकर किया जाता है।
कुछ छोटी पथरियां डॉक्टर की निगरानी, दर्द नियंत्रित करने वाली दवाओं और जरूरत के मुताबिक अन्य दवाओं की मदद से अपने आप पेशाब के रास्ते निकल सकती हैं। लेकिन यह मानकर घर पर इंतजार करना सुरक्षित नहीं है कि हर छोटी पथरी खुद निकल जाएगी। डॉक्टर जांच और इमेजिंग रिपोर्ट के आधार पर उचित सलाह देते हैं।
यदि पथरी बड़ी है, पेशाब के रास्ते में फंस गई है, किडनी में सूजन या रुकावट पैदा कर रही है अथवा दर्द नियंत्रित नहीं हो रहा, तो किसी प्रक्रिया या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। पथरी के इलाज में मरीज की स्थिति के अनुसार शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (ESWL), यूरेटेरोस्कोपी और लेजर या PCNL जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
एक व्यक्ति कितनी बार पथरी की सर्जरी करा सकता है?
किडनी स्टोन की सर्जरी के लिए सभी मरीजों पर लागू होने वाली कोई निश्चित संख्या नहीं है। जरूरत पड़ने पर एक व्यक्ति का एक से अधिक बार उपचार किया जा सकता है। हालांकि, हर प्रक्रिया के लाभ और जोखिम का आकलन डॉक्टर करते हैं।
बार-बार पथरी होने पर केवल उसे निकालते रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। यह जानना जरूरी है कि पथरी किस प्रकार की है और शरीर में ऐसी कौन-सी स्थिति मौजूद है, जिसके कारण वह फिर बन रही है।
डॉक्टर जरूरत के मुताबिक निकाली गई पथरी का लैब विश्लेषण, खून की जांच और 24 घंटे के पेशाब की जांच करा सकते हैं। इनसे पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सलेट, यूरिक एसिड और साइट्रेट जैसे पदार्थों का स्तर समझने में मदद मिलती है। रिपोर्ट के आधार पर खानपान में बदलाव या कुछ मरीजों के लिए दवाओं की सलाह दी जा सकती है।
दोबारा पथरी बनने से कैसे बचें?
पथरी दोबारा बनने का जोखिम कम करने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।
- पर्याप्त तरल पदार्थ लें: दिनभर नियमित रूप से पानी पिएं। कितनी मात्रा उचित है, यह मौसम, गतिविधि और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। जिन लोगों को हृदय या किडनी की बीमारी के कारण तरल पदार्थ सीमित रखने को कहा गया है, वे डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
- नमक सीमित रखें: भोजन में अतिरिक्त नमक और बहुत ज्यादा नमकीन पैकेटबंद खाद्य पदार्थों से बचें।
- संतुलित आहार अपनाएं: फल, सब्जियां और संतुलित मात्रा में प्रोटीन लें। कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थों को खुद से पूरी तरह बंद न करें; आहार में बदलाव पथरी के प्रकार के अनुसार होना चाहिए।
- बिना सलाह सप्लीमेंट न लें: कैल्शियम, विटामिन-डी या अन्य सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
- फॉलोअप कराते रहें: पहले पथरी हो चुकी है या बार-बार बनती है, तो डॉक्टर के बताए समय पर जांच कराएं।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
कमर या पेट के एक तरफ तेज दर्द, पेशाब में खून, उल्टी या पेशाब करते समय परेशानी किडनी स्टोन के लक्षण हो सकते हैं। यदि तेज दर्द के साथ बुखार या कंपकंपी हो, पेशाब बंद हो जाए या हालत तेजी से बिगड़ रही हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। पेशाब के रास्ते में रुकावट के साथ संक्रमण गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।


