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बालेन शाह की ‘वन-टू-वन’ डिप्लोमेसी शुरू! PM बनते ही सबसे पहले भारत के राजदूत से मुलाकात, चीन-अमेरिका से पहले क्यों बढ़ाया हाथ?

काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह यानी बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद अपनी पहली ‘वन-टू-वन’ राजनयिक बैठक भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ की। सिंहदरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई इस मुलाकात को भारत-नेपाल संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

करीब एक घंटे चली बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने, आपसी सहयोग बढ़ाने और विकास साझेदारी को आगे ले जाने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी बैठक की पुष्टि की गई है।

भारत के राजदूत के साथ पहली आमने-सामने बैठक

प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह की किसी विदेशी राजनयिक के साथ यह पहली आमने-सामने द्विपक्षीय बैठक बताई जा रही है। खास बात यह है कि उनकी पहली ऐसी बैठक भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ हुई।

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया पर जारी जानकारी के मुताबिक, बैठक में नेपाल-भारत संबंधों को और मजबूत करने, आपसी सहयोग को बढ़ावा देने और दोनों देशों के पारस्परिक हित में विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

इस मुलाकात ने बालेन शाह की विदेश नीति को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। खासकर इसलिए क्योंकि भारत के बाद उनकी चीन के राजदूत और फिर अमेरिकी प्रतिनिधि के साथ भी अलग-अलग बैठकें प्रस्तावित थीं।

प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाएं लेकर पहुंचे भारतीय राजदूत

बैठक के बाद भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बालेन शाह को शुभकामनाएं दीं।

श्रीवास्तव ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच भारत-नेपाल की मजबूत और बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने को लेकर सार्थक बातचीत हुई।

इस मुलाकात से यह संकेत भी मिलता है कि दोनों देश अपने पारंपरिक संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ विकास और सहयोग के नए क्षेत्रों पर भी ध्यान देना चाहते हैं।

चीन के राजदूत से भी होगी मुलाकात

भारत के राजदूत के साथ बैठक के बाद बालेन शाह की चीन के राजदूत झांग माओमिंग के साथ भी आमने-सामने बातचीत निर्धारित बताई गई है। इसके बाद अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स स्कॉट अर्बोम के साथ उनकी मुलाकात होनी है।

यानी नेपाल के प्रधानमंत्री अब अलग-अलग देशों के राजनयिक प्रतिनिधियों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत का सिलसिला शुरू कर रहे हैं। इसे उनकी विदेश नीति में एक नए चरण की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

इससे पहले शाह राजदूतों के साथ व्यक्तिगत बैठकों के बजाय समूह में बातचीत को प्राथमिकता देते रहे थे। ऐसे में भारत के राजदूत के साथ पहली द्विपक्षीय बैठक ने स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है।

बैठकों में देरी की वजह क्या रही?

प्रधानमंत्री के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इन उच्चस्तरीय राजनयिक बैठकों की तैयारी पहले ही पूरी कर ली गई थी। हालांकि, सुनसारी में हुई हाल की घटनाओं के कारण बैठकों के कार्यक्रम में कुछ देरी हुई।

अब इन बैठकों का सिलसिला शुरू होने के बाद नेपाल की विदेश नीति और भारत, चीन तथा अमेरिका के साथ उसके संबंधों को लेकर नई चर्चाएं सामने आ रही हैं।

भारत-नेपाल की दोस्ती सात दशक से ज्यादा पुरानी

भारत और नेपाल के संबंध केवल राजनीतिक या कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी का इतिहास कई दशक पुराना है।

नेपाल में आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास में भारत की भागीदारी की शुरुआत 1951 में काठमांडू के गौचर हवाई अड्डे के निर्माण के साथ बताई जाती है। इसका निर्माण 1954 में पूरा हुआ था।

इसी अवधि में नेपाल में भारत के विकास सहयोग से जुड़ी परियोजनाओं के समन्वय के लिए ‘इंडियन एड मिशन’ की स्थापना भी की गई थी।

समय के साथ दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है। आज भारत की विकास साझेदारी नेपाल में स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, सड़क और कनेक्टिविटी, व्यापार, कृषि, सांस्कृतिक विरासत, पुरातत्व और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों तक फैली हुई है।

नेपाल की प्राथमिकताओं के हिसाब से परियोजनाएं

भारत की ओर से नेपाल में संचालित विकास परियोजनाओं को स्थानीय जरूरतों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया जाता है। ये परियोजनाएं नेपाल के अलग-अलग क्षेत्रों में लागू की जाती हैं और स्थानीय विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग करती हैं।

ऐसे में बालेन शाह और भारतीय राजदूत की ताजा बैठक केवल एक औपचारिक शिष्टाचार मुलाकात तक सीमित नहीं मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विकास सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए यह बातचीत महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

अब नजर शाह की आगे की कूटनीति पर

भारत के राजदूत के साथ पहली वन-टू-वन बैठक के बाद अब बालेन शाह की चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों के साथ होने वाली मुलाकातों पर भी नजर रहेगी।

इन बैठकों से नेपाल की प्राथमिकताओं और नई सरकार की विदेश नीति की दिशा को समझने में मदद मिल सकती है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने और विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने को बैठक का मुख्य केंद्र बताया गया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बालेन शाह की नई राजनयिक शैली नेपाल के भारत, चीन और अन्य प्रमुख साझेदारों के साथ संबंधों को किस दिशा में ले जाती है।

News Desk

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