लखनऊ। आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) द्वारा 2022 में गिरफ्तार किए गए कथित आतंकी मोहम्मद कामिल उर्फ कामिल को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
पैरिटी के सिद्धांत का हवाला:
अदालत ने कहा कि मामले के अन्य छह सहआरोपी पहले ही समान आरोपों में जमानत पा चुके हैं। न्याय के सिद्धांतों के तहत समानता (Parity) का पालन करते हुए कामिल को भी राहत दी जानी चाहिए। आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने 15 अक्टूबर 2025 को दिया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश:
मोहम्मद कामिल की अपील पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिनांक 12 सितंबर 2025 प्रस्तुत किया गया, जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा कि NIA एक्ट की धारा 21(5) से संबंधित लंबित मामलों को तीन महीने में मेरिट पर निपटाया जाए। हाईकोर्ट ने इस निर्देश का पालन करते हुए सुनवाई की और कामिल को जमानत दी।
केस विवरण:
कामिल पर धारा 121-A, 123 IPC और धारा 13, 18, 18-B, 20, 38 UAPA के तहत केस दर्ज था। विशेष न्यायाधीश ने 3 फरवरी 2023 को कामिल की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
सहआरोपियों की जमानत:
कामिल के छह सहआरोपी—मोहम्मद अलीम, लुकमान, मुदस्सिर, मोहम्मद नदीम, मोहम्मद हरीश और कारी शहजाद—को 14 मई 2024 को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।
जमानत की शर्तें:
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₹1 लाख का निजी मुचलका और दो विश्वसनीय जमानती।
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पासपोर्ट होने पर कोर्ट में जमा करना।
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किसी गवाह या साक्ष्य को प्रभावित न करना।
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पुलिस स्टेशन में नियमित हाजिरी दर्ज कराना।
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ट्रायल में पूरा सहयोग करना।
आतंकी मॉड्यूल:
ATS ने 2022 में लखनऊ, कानपुर समेत कई जिलों में छापेमारी कर UAPA के तहत आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया था। इस मॉड्यूल के नौ कथित सदस्यों में से छह को 2024 में और अब मोहम्मद कामिल को 2025 में हाईकोर्ट से राहत मिली है।


