उत्तर प्रदेश: में बेमौसम बारिश ने एक बार फिर कहर बरपा दिया है। किसानों की हजारों एकड़ फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 18 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। पूर्वांचल के कई जिलों में सुबह से ही घने बादल छाए हुए हैं और 10-20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, आज से तूफान मोन्था का असर कम होना शुरू हो जाएगा। तीन दिनों में उत्तर प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में धूप निकलने और दिन का तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने की संभावना जताई गई है।
🌦️ शुक्रवार को 20 शहरों में हुई बारिश
वाराणसी, बलिया, मऊ समेत करीब 20 जिलों में बारिश दर्ज की गई।
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जालौन में तापमान 10 डिग्री तक गिरकर 22°C पहुंच गया।
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मिर्जापुर में पारा 9 डिग्री गिरा।
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लखनऊ और गोरखपुर मंडल में 4 डिग्री की गिरावट रही।
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कानपुर मंडल में 2 डिग्री तक तापमान घटा।
बाराबंकी में न्यूनतम तापमान 17°C दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम था।
🌾 बारिश ने बर्बाद की किसानों की मेहनत
कौशांबी, बलिया, वाराणसी, झांसी और गोंडा जैसे जिलों में खेतों में पानी भर गया।
धान की कटाई के बाद खेतों में पड़ी फसलें भीगकर खराब हो गईं। कई जगह तेज हवाओं से खड़ी फसलें गिर गईं।
धान के दानों में फफूंद लगने का खतरा बढ़ गया है।
कौशांबी में नवीन मंडी ओसा में रखा करीब 1000 क्विंटल धान बारिश से भीग गया।
झांसी में फसल खराब होने से परेशान एक किसान ने आत्महत्या कर ली।
उनके बेटे ने बताया कि “पिता 15 बीघा खेत की फसल बर्बाद होने से टूट गए थे, बहन की शादी के खर्च को लेकर चिंतित थे।”
🏛️ सीएम योगी का निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को प्रभावित किसानों का सर्वे कराकर तत्काल मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
राज्य सरकार ने कृषि विभाग और राजस्व टीमों को फसल नुकसान का आंकलन करने के लिए गांव-गांव भेजा है।
🌱 गेहूं और रबी की बुआई के लिए अनुकूल मौसम
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ने के कारण गेहूं, चना, मसूर, मटर और सरसों की बुआई के लिए यह मौसम बेहद लाभदायक है।
बिना सिंचाई के भी खेतों की जोताई और बुआई आसान हो जाएगी, जिससे अंकुरण बेहतर रहेगा।
🌪️ दो चक्रवातों ने बदला यूपी का मौसम
मौसम विशेषज्ञ प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि यूपी का मौसम एक साथ दो चक्रवातों से प्रभावित हुआ —
एक गुजरात तट से और दूसरा बंगाल की खाड़ी से उठा।
अब दोनों का असर कमजोर पड़ रहा है, जिससे धीरे-धीरे मौसम सामान्य होगा।
🌡️ ला-नीना से बढ़ेगी ठंड
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार ला-नीना के कारण ठंड ज्यादा पड़ेगी।
NOAA के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर के बीच ला-नीना बनने की संभावना 71% है,
जबकि दिसंबर से फरवरी के बीच यह 54% रहेगी।
इससे पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) अधिक सक्रिय होगा,
उत्तर भारत में भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में तेज ठंड, कोहरा और धुंध देखने को मिलेगी।
📊 मानसून रिपोर्ट 2025
इस साल यूपी में मानसून सीजन (1 जून–30 सितंबर) के दौरान औसत 701.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।
1–10 अक्टूबर तक 42.3 मिमी बारिश हुई, जिससे कुल 743.9 मिमी बारिश हुई —
जो सामान्य बारिश (746.2 मिमी) के लगभग बराबर है।
30 जिलों में सामान्य बारिश रही, जबकि 13 जिलों में औसत से कम।


