लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि आज ‘जय श्रीराम’ और ‘जय बजरंगबली’ के जयकारे मुस्लिम समाज के घरों और मस्जिदों को तोड़ने के औजार बना दिए गए हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि एक धर्म के नाम पर लोगों में आतंकवादी प्रवृत्ति पैदा की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने का काम कर रही है।
दलित और मुस्लिम समाज को बनाया जा रहा निशाना
मौर्य ने कहा कि यूपी में दलितों और मुसलमानों पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं। गरीबों के घर बुलडोजर से गिराए जा रहे हैं, जबकि भाजपा से जुड़े अपराधियों को पूरा संरक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। अपराधियों को सत्ता का संरक्षण मिल रहा है और इसी वजह से उनका मनोबल बढ़ा हुआ है।”
महिला अपराधों में यूपी नंबर वन
स्वामी प्रसाद मौर्य ने एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश महिला अपराध, बलात्कार, हत्या और जातीय हिंसा के मामलों में देश में सबसे ऊपर है।
उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्य — गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान — में भी स्थिति अलग नहीं है। वहाँ भी दलितों और पिछड़ों पर अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं।
फतेहपुर और अलीगढ़ की घटनाओं का जिक्र
मौर्य ने कहा कि फतेहपुर के मकबरे पर “जय श्रीराम” के नारे लगाकर हमला किया गया। वहीं, अलीगढ़ में मंदिर की दीवार पर “आई लव मोहम्मद” लिखकर हिंदू-मुस्लिम दंगा भड़काने की साजिश की गई।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं भाजपा की नीतियों का परिणाम हैं, जो समाज को बांटने का काम कर रही हैं।
न्यायपालिका तक असुरक्षित: मौर्य
पूर्व मंत्री ने कहा कि भाजपा शासन में केवल जनता ही नहीं बल्कि न्यायपालिका भी असुरक्षित है।
उन्होंने कहा, “दो-दो महामहिम राष्ट्रपति को मंदिर में जाने से रोका गया था, अब सुप्रीम कोर्ट के जज पर जूता फेंका गया। यह संविधान और न्याय पर हमला है।”
3 नवंबर को प्रदेशव्यापी धरना
मौर्य ने घोषणा की कि यदि सुप्रीम कोर्ट में जज पर जूता फेंकने वाले की गिरफ्तारी जल्द नहीं होती, तो 3 नवंबर को पूरे प्रदेश के हर जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
इस दौरान राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपा जाएगा।
ज्ञापन में कानून व्यवस्था की गिरती स्थिति, दलितों पर अत्याचार और सरकार की निष्क्रियता का विरोध दर्ज कराया जाएगा।


