लखनऊ: के गोमती नगर इलाके में रविवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक सिपाही को काली स्कॉर्पियो में जबरन बैठाकर ले जाने की सूचना फैली। देखते ही देखते ‘अपहरण’ की खबर पुलिस महकमे तक पहुंच गई। अफसर मौके पर पहुंचे, जांच शुरू हुई — और फिर सामने आया ऐसा सच जिसने सभी को चौंका दिया।
कौन है सिपाही?
उठाए गए सिपाही की पहचान ग्वारी गांव निवासी अखिलेश त्रिपाठी के रूप में हुई। वह विशेष सुरक्षा वाहिनी में तैनात थे, जिसका गठन मायावती सरकार के दौरान स्मारक समिति की सुरक्षा व्यवस्था के लिए किया गया था। इन दिनों उनकी ड्यूटी अंबेडकर पार्क में थी।
कैसे हुई पूरी घटना?
रविवार सुबह करीब 9 बजे अखिलेश त्रिपाठी अपने दो बेटों के साथ टहलने निकले थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:
- अचानक एक काली स्कॉर्पियो उनके पास आकर रुकी
- गाड़ी से उतरे लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया
- सिपाही को जबरन गाड़ी में बैठाया गया
- और टीम उन्हें लेकर मौके से रवाना हो गई
घटना इतनी तेजी से हुई कि आसपास के लोग समझ ही नहीं पाए कि यह अपहरण है या पुलिस कार्रवाई। घबराए परिजनों और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
मौके पर पहुंची पुलिस, शुरू हुई पड़ताल
सूचना मिलते ही गोमती नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। शुरुआती जांच में मामला अपहरण जैसा लग रहा था, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।
पुलिस ने परिजनों और स्थानीय लोगों से पूछताछ की। लेकिन कुछ ही देर में जांच ने पूरा मामला पलट दिया।
2002 का पुराना केस, 25 हजार का इनाम
सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश त्रिपाठी वर्ष 2002 के एक पुराने मुकदमे में वांछित थे। उस मामले में उन पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित था। लंबे समय से फरार चल रहे इस मामले में राजस्थान पुलिस उनकी तलाश कर रही थी।

राजस्थान पुलिस की दबिश
जांच में खुलासा हुआ कि यह ‘अपहरण’ नहीं बल्कि राजस्थान पुलिस की कार्रवाई थी।
राजस्थान पुलिस की टीम लोकेशन ट्रेस कर लखनऊ पहुंची थी। टीम ने बिना शोर-शराबे के दबिश देकर अखिलेश त्रिपाठी को हिरासत में लिया और अपने साथ ले गई।
जैसे ही यह जानकारी सामने आई, लखनऊ पुलिस और प्रशासन ने राहत की सांस ली।
पुलिस महकमे में क्यों मचा था हड़कंप?
एक ड्यूटी पर तैनात सिपाही को खुलेआम कार में बैठाकर ले जाना गंभीर मामला माना जा रहा था। इसलिए शुरुआती सूचना ने पुलिस विभाग को अलर्ट मोड में ला दिया। हालांकि सच्चाई सामने आते ही स्थिति स्पष्ट हो गई।
अब आगे क्या?
राजस्थान पुलिस अब 2002 के मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। वहीं स्थानीय पुलिस इस पूरी घटना की औपचारिक रिपोर्ट तैयार कर रही है।
लखनऊ में काली स्कॉर्पियो से सिपाही को उठाए जाने की खबर ने सनसनी फैला दी थी, लेकिन जांच में यह एक इनामी आरोपी की गिरफ्तारी निकली। 2002 के पुराने केस में वांछित और 25 हजार के इनामी सिपाही को राजस्थान पुलिस अपने साथ ले गई।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि कानून से कोई भी ऊपर नहीं — चाहे वह खुद वर्दीधारी ही क्यों न हो।


