लखनऊ। गोमती नगर के विराम खंड इलाके में रहने वाले कृपा शंकर गौतम (77), जो कि केंद्रीय मंत्रालय से रिटायर संयुक्त निदेशक हैं, साइबर जालसाजों के नए पैंतरे का शिकार बन गए। जालसाजों ने उन्हें डिजिटल माध्यम से फर्जी अरेस्ट करने की धमकी दी और झूठे आरोप मढ़कर 12 लाख रुपये की ठगी की।
फर्जी आरोपों की कहानी
जालसाजों ने कृपा शंकर गौतम पर आरोप लगाया कि उन्होंने मनी लांड्रिंग की है और लगभग 200 महिलाओं को अश्लील मैसेज भेजे हैं। इसके साथ ही यह धमकी दी गई कि यदि आवश्यक राशि नहीं दी गई तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। वृद्ध पूर्व अधिकारी मानसिक रूप से परेशान हो गए और दबाव में आकर 12 लाख रुपये साइबर फ्रॉडर्स को ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस को दी शिकायत
कृपा शंकर गौतम ने मामले की जानकारी मिलते ही लखनऊ साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही उन्होंने साइबर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम भी गठित की है।
साइबर अपराध का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर इस तरह की ठगी तेजी से बढ़ती जा रही है। वे सभी नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं और अनुरोध कर रहे हैं कि कोई भी संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर तुरंत पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें।
प्रशासन का रुख
लखनऊ पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बताया कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अन्य नागरिकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है ताकि इस तरह के साइबर फ्रॉड से बचा जा सके।
निष्कर्ष:
कृपा शंकर गौतम के साथ हुई यह ठगी घटना साइबर अपराध की गहराई को उजागर करती है। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ऐसे धोखेबाज अब बड़े पैमाने पर लोगों को निशाना बना रहे हैं। प्रशासन और पुलिस की कड़ी कार्रवाई से ऐसे गिरोहों को जल्द सबक सिखाया जाएगा।


