लखनऊ के पारा इलाके: में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। मौके से चार तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि ये इंजेक्शन मानव और पशु स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं और इन्हें बिहार से मिनरल वाटर की बोतलों में भरकर लाया गया था। पकड़ी गई फैक्ट्री में इन इंजेक्शनों का बड़े पैमाने पर निर्माण हो रहा था।
तस्करी और फैक्ट्री का खुलासा
FSDA और STF की टीम ने बताया कि तस्करों ने इन ऑक्सीटोसिन इंजेक्शनों को अवैध रूप से बिहार से लाकर लखनऊ में फैक्ट्री में पैक किया और फिर वितरण के लिए तैयार किया।
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इंजेक्शन की अनुमानित कीमत 2 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
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यह इंजेक्शन नशीले पदार्थों की श्रेणी में आता है और बिना लाइसेंस के बनाना और बेचना गंभीर अपराध है।
गिरफ्तार आरोपी और कार्रवाई
छापेमारी में चार तस्करों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने बताया कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है और फैक्ट्री में मिले सभी इंजेक्शनों को कब्जे में ले लिया गया है।
FSDA और STF ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि भविष्य में ऐसे अवैध इंजेक्शन बनाने वाले किसी भी संगठन को सक्रिय रूप से रोका जाए।
अधिकारियों की चेतावनी
FSDA के अधिकारी ने कहा:
“ऑक्सीटोसिन का उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह के खतरनाक है। इसे अवैध रूप से बनाना और बेचना कानून के खिलाफ है। जनता से अपील है कि ऐसी सामग्री से दूर रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें।”
एसटीएफ के अधिकारी ने भी कहा कि तस्करों की इस गिरोह को पूरी तरह उजागर किया जाएगा और भविष्य में ऐसे मामलों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
निष्कर्ष
लखनऊ में नशीले इंजेक्शन की फैक्ट्री पकड़े जाने से यह स्पष्ट होता है कि अवैध दवा और इंजेक्शन तस्करी के खिलाफ प्रशासन सतर्क है। FSDA और STF की संयुक्त कार्रवाई से न सिर्फ अवैध निर्माण रोका गया, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए बड़ा कदम भी उठाया गया।


