अयोध्या: की रामलीला का सातवां दिन भावनाओं और भक्ति से सराबोर रहा। इस दिन मंच पर रावण और मारीच का प्रसंग दिखाया गया, जिसमें सोने का हिरण बनकर मारीच ने माता सीता को छल लिया और रावण ने उनका हरण कर लिया। इस दृश्य को देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
शूर्पणखा के अपमान का बदला
रामलीला के मंचन में दिखाया गया कि बहन शूर्पणखा की नाक कटने से आहत लंकापति रावण ने सीता माता का हरण करने की योजना बनाई। इसके लिए उसने अपने मामा मारीच को सोने का हिरण बनकर राम-लक्ष्मण की कुटिया के पास जाने का आदेश दिया।
सोने के हिरण की सुंदरता से प्रभावित होकर सीता माता ने भगवान राम से उसे लाने का आग्रह किया। राम जब हिरण का पीछा करने गए तो मारीच ने राम की आवाज में पुकार लगाई। सीता की सुरक्षा को लेकर चिंतित लक्ष्मण भी कुटिया से बाहर निकल गए। इसी मौके का फायदा उठाकर रावण साधु के वेश में आया और सीता माता का हरण कर लिया।
शबरी प्रसंग ने बांधा समां
सातवें दिन का मंचन केवल सीता हरण तक ही सीमित नहीं रहा। दर्शकों को शबरी प्रसंग भी दिखाया गया। जब भगवान राम शबरी की कुटिया पहुंचे तो उन्होंने प्रेमपूर्वक उनके जूठे बेर खाए। इस दृश्य ने पूरी सभा को भावुक कर दिया और भक्तिमय वातावरण में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।
दर्शक हुए भावविभोर
रामलीला में हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। मंचन के दौरान कई बार दर्शक खुद को भावनाओं से रोक नहीं पाए और “जय श्रीराम” के उद्घोष से पूरा पंडाल गूंज उठा।
धार्मिक आस्था और सामाजिक संदेश
अयोध्या की रामलीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि धर्म और संस्कृति की गहरी झलक है। सीता हरण का प्रसंग बुराई के छल-कपट का प्रतीक है, वहीं शबरी प्रसंग सिखाता है कि भगवान के लिए सच्ची भक्ति और प्रेम सबसे बड़ा उपहार है।


