लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा संचालित मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत “बाल विवाह को ना” कार्यक्रम ने बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में नई इबारत लिखी है। अंतरराष्ट्रीय बालिका सप्ताह (3 से 11 अक्टूबर) के अवसर पर आयोजित इस अभियान ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ समाज में एकजुटता और जागरूकता की नई लहर पैदा की है।
इस ऐतिहासिक पहल के तहत राज्य के सभी जिलों में सामुदायिक केंद्रों, विद्यालयों और पंचायतों में गोष्ठियां, नाटक, संवाद और प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन आयोजनों में विशेषज्ञों, अध्यापकों, समाजसेवियों और बालिकाओं ने खुलकर बाल विवाह के दुष्परिणामों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बाल विवाह से न केवल बालिकाओं की शिक्षा बाधित होती है, बल्कि यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में वृद्धि का प्रमुख कारण भी है। किशोरावस्था में विवाह और मातृत्व शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है तथा घरेलू हिंसा के खतरे को भी बढ़ाता है।

कार्यक्रम का सबसे प्रेरक क्षण रहा उन साहसी बेटियों का सम्मान, जिन्होंने समाज और परिवार के दबावों को ठुकराते हुए विवाह से इनकार किया और शिक्षा व आत्मनिर्भरता का मार्ग चुना। इन बालिकाओं के साहस ने समाज को एक सशक्त संदेश दिया — हर बालिका को अपने जीवन का निर्णय लेने का अधिकार है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बाल विवाह की दर 15.8 प्रतिशत है, जो कि राष्ट्रीय औसत 23.3 प्रतिशत से काफी कम है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या अधिक प्रचलित है, लेकिन योगी सरकार के सतत प्रयासों से इसमें उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। अब तक विभाग ने 2000 से अधिक संभावित बाल विवाह रोके हैं, जिससे सैकड़ों बालिकाओं का भविष्य सुरक्षित हुआ है।

भारत सरकार के बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। इसी के क्रियान्वयन को सशक्त बनाने के लिए प्रदेश में जिला प्रोबेशन अधिकारियों को प्रतिषेध अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। कानून के साथ-साथ परिवारों और समुदायों में मानसिकता परिवर्तन लाने के उद्देश्य से मिशन शक्ति 5.0 के तहत निरंतर जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

अभियान की सफलता पर महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जोहरी ने कहा,
“बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बालिकाओं के अधिकारों का उल्लंघन है। सरकार शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण के माध्यम से बालिकाओं को मजबूत बना रही है। आज की बालिका का साहस ही नए उत्तर प्रदेश की पहचान बनेगा। सामूहिक प्रयास से ही इस कुप्रथा का अंत संभव है।”
मिशन शक्ति 5.0 का यह अभियान न केवल कानून और प्रशासनिक प्रयासों से बल्कि सामाजिक चेतना के स्तर पर भी परिवर्तन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है।



