लखनऊ। उन्नाव के कैब ड्राइवर योगेश पाल हत्याकांड में शामिल कुख्यात बदमाश अजय सिंह उर्फ अमरजीत को लखनऊ पुलिस ने शुक्रवार देर रात मुठभेड़ में घायल कर दिया। गोली उसके पैर में लगी, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल में भर्ती कराया।
यह मुठभेड़ पारा थाना क्षेत्र के मौदा मोड़ के पास हुई। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस की गोली उसके पैर में जा लगी।
कैसे हुई मुठभेड़
डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के पास किसान पथ अंडरपास पर पुलिस चेकिंग कर रही थी।
इस दौरान एक संदिग्ध कार को रुकने का इशारा किया गया, लेकिन उसमें सवार लोगों ने गाड़ी रोकने के बजाय उसे पीछे मोड़ लिया और भागने लगे।
पुलिस ने पीछा किया तो कार डिवाइडर से टकरा गई। दो लोग कार से उतरे — एक भाग गया, जबकि दूसरे ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में अजय सिंह उर्फ अमरजीत के पैर में गोली लगी।
पुलिस को मिले हथियार और कार
घायल बदमाश के पास से 0.315 बोर का तमंचा, जिंदा कारतूस और खोखा बरामद किया गया।
पुलिस ने बताया कि कार की नंबर प्लेट पर टेप चिपकाकर नंबर छिपाया गया था, ताकि पहचान न हो सके। यही टेप हत्या के दौरान योगेश के चेहरे पर भी लगाया गया था।
बदमाश का आपराधिक इतिहास
अजय सिंह उर्फ अमरजीत हरदोई के पिहानी का रहने वाला है। उसके खिलाफ कई जिलों में आधा दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हैं।
पुलिस पूछताछ में उसने कबूल किया कि उसका साथी गुरु सेवक अभी फरार है।
उसने यह भी बताया कि वे कुछ दिन पहले शाहजहांपुर जिले के रोजा थाना क्षेत्र में एक ट्रैवलर गाड़ी के चालक अवनीश दीक्षित की भी हत्या कर चुके हैं।
उस मामले में शाहजहांपुर पुलिस पहले से जांच कर रही है।
क्या था मामला
उन्नाव जिले के बांगरमऊ निवासी योगेश पाल (27) लखनऊ के पारा क्षेत्र के बुद्धेश्वर में रहते थे और ओला कैब चलाते थे।
29 सितंबर की शाम वे ओला बुकिंग पर सीतापुर के लिए निकले थे, लेकिन घर नहीं लौटे।
पत्नी बंदना से रात 9 बजे आखिरी बार बात करने के बाद उनका मोबाइल बंद हो गया।
अगले दिन परिजनों ने पारा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
3 अक्टूबर को सीतापुर जिले के पिसावां थाना क्षेत्र के सरियापुर-फुक्हा गांव के पास खेतों में उनका शव मिला।
हत्या से पहले बर्बर पिटाई
पुलिस ने पाया कि योगेश के दोनों हाथ पीछे बंधे थे और चेहरा टेप से लिपटा हुआ था।
फॉरेंसिक जांच में स्पष्ट हुआ कि पहले निर्दयता से पिटाई की गई और फिर दम घोंटकर हत्या कर दी गई।
उनकी अर्टिगा कार और मोबाइल फोन दोनों गायब थे।
लूट की नीयत से हत्या
पुलिस की प्रारंभिक जांच में लूट का एंगल सबसे मजबूत पाया गया।
बदमाशों ने कैब ड्राइवर की हत्या कर गाड़ी लूट ली थी।
बाद में लखनऊ क्राइम टीम और पारा पुलिस ने मिलकर मामले की जांच की और अजय सिंह को पकड़ लिया।


