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₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? GST की खबर ने बढ़ाई टेंशन, सरकार ने साफ किया पूरा नियम—किसकी जेब पर पड़ेगा असर?

नई दिल्ली: अगर आप रोजाना UPI से भुगतान करते हैं तो ₹2,000 की सीमा को लेकर चल रही खबरों ने आपको भी भ्रमित किया होगा। सोशल मीडिया और अलग-अलग रिपोर्टों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या अब ₹2,000 से ज्यादा का UPI भुगतान करने पर ग्राहक से शुल्क लिया जाएगा? क्या उस भुगतान पर GST भी लगेगा? सरकार के ताजा स्पष्टीकरण के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है।

सबसे पहले सबसे जरूरी बात समझ लीजिए—₹2,000 से ज्यादा का UPI भुगतान करने मात्र से ग्राहक को कोई अलग UPI ट्रांजैक्शन फीस नहीं देनी होगी। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। इसी तरह ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के भुगतान भी प्रभावित नहीं होंगे। सरकार के मुताबिक लगभग 96 प्रतिशत P2M लेनदेन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।

आखिर ₹2,000 की सीमा का मतलब क्या है?

असल में ₹2,000 को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम पैदा हुआ है। नई व्यवस्था में चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेनदेन पर ₹2,000 से ऊपर MDR लागू किया जाएगा। इसका भुगतान ग्राहक नहीं बल्कि संबंधित व्यापारी/मर्चेंट करेगा।

15 अक्टूबर 2026 से ऐसे पात्र लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने की व्यवस्था घोषित की गई है। यानी यदि कोई पात्र व्यापारी ₹10,000 का UPI भुगतान स्वीकार करता है, तो MDR की गणना इसी लेनदेन के आधार पर होगी। यह ग्राहक के बैंक खाते से अलग से काटे जाने वाला UPI शुल्क नहीं है।

GST को लेकर क्यों मचा है इतना भ्रम?

अब आते हैं उस सवाल पर जिसने व्यापारियों और ग्राहकों दोनों का ध्यान खींचा है—क्या UPI पर 18 प्रतिशत GST लगेगा?

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 18 प्रतिशत GST लागू MDR/फीस पर लगाया जाएगा, पूरी UPI पेमेंट राशि पर नहीं। यानी GST ₹10,000 के पूरे भुगतान पर 18 प्रतिशत नहीं होगा।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी पात्र ₹10,000 के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी ₹40 बनता है, तो 18 प्रतिशत GST ₹40 के MDR पर होगा, जो ₹7.20 बैठता है। इस तरह MDR और उस पर GST को मिलाकर व्यापारी की शुरुआती लागत ₹47.20 हो सकती है।

यह अंतर समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि ‘₹10,000 UPI भुगतान पर 18% GST’ जैसी बात तथ्यात्मक रूप से भ्रामक होगी।

क्या ग्राहक को ₹5,000 या ₹10,000 भेजने पर पैसा देना होगा?

नहीं। मौजूदा सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक सामान्य UPI ग्राहक को केवल इसलिए कोई शुल्क नहीं देना होगा क्योंकि भुगतान ₹2,000 से ज्यादा है।

अगर आप किसी दोस्त या रिश्तेदार को ₹5,000, ₹10,000 या उससे ज्यादा रकम UPI से भेजते हैं तो यह P2P transaction है और यह मुफ्त रहेगा। सरकार ने साफ किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले UPI लेनदेन पर नई MDR व्यवस्था का असर नहीं पड़ेगा।

इसी तरह ग्राहक किसी व्यापारी को भुगतान करता है तो भी नए MDR का उद्देश्य ग्राहक से अलग शुल्क वसूलना नहीं है।

GST का फायदा किसे मिल सकता है?

GST-पंजीकृत व्यापारियों के लिए MDR पर भुगतान किया गया GST सामान्य नियमों के अधीन Input Tax Credit यानी ITC के रूप में समायोजित किया जा सकता है। इसका अर्थ है कि पात्र कारोबारी अपने टैक्स दायित्व के खिलाफ इस GST का क्रेडिट ले सकते हैं।

हालांकि हर कारोबारी की स्थिति एक जैसी नहीं होगी। जिन कारोबारों में GST से छूट प्राप्त सप्लाई होती है या जो ITC के लिए पात्र नहीं हैं, उनके लिए यह लागत अलग तरीके से प्रभावित हो सकती है।

MDR आखिर होता क्या है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए व्यापारी पक्ष के भुगतान तंत्र में लगाया जाता है। यह कोई नया ‘UPI टैक्स’ नहीं है।

सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि MDR खुद सरकार या NPCI द्वारा ग्राहक से वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग हिस्सेदारों—जैसे बैंक और पेमेंट ऐप प्रदाताओं—के बीच वितरित होने वाला शुल्क है।

15 अक्टूबर से क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है। इसके तहत:

  • P2P UPI भुगतान: मुफ्त।
  • ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान: मुफ्त।
  • चुनिंदा ₹2,000 से ऊपर P2M भुगतान: 0.4% MDR।
  • MDR पर GST: लागू MDR/फीस पर 18% GST की जानकारी सामने आई है।
  • ग्राहक से सीधा UPI चार्ज: नहीं।
  • छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था: जारी रहेगी।

कुछ विशेष श्रेणियों के लेनदेन के लिए अलग शुल्क संरचना भी रखी गई है। इसलिए हर ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतान को एक ही नियम में रखना सही नहीं होगा।

UPI यूजर्स को क्या याद रखना चाहिए?

UPI इस्तेमाल करने वालों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि ₹2,000 कोई ऐसी सीमा नहीं है जिसके ऊपर ग्राहक से अचानक UPI फीस वसूलना शुरू हो जाएगा।

असल बदलाव भुगतान स्वीकार करने वाले कुछ व्यापारियों से संबंधित है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति ₹5,000 का भुगतान करता है तो उसे सिर्फ रकम ₹2,000 से ज्यादा होने के कारण अतिरिक्त शुल्क देने की जरूरत नहीं है।

वहीं कारोबारियों के लिए MDR और उस पर लागू GST की गणना को समझना जरूरी होगा। खासकर ऐसे व्यापारी जिनके रोजाना बड़े मूल्य के डिजिटल भुगतान होते हैं, उन्हें अपने भुगतान सेवा प्रदाता और टैक्स सलाहकार से लागू नियमों की पुष्टि करनी चाहिए।

News Desk

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