79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने संविधान और लोकतंत्र की सर्वोच्चता पर जोर देते हुए कहा कि “हमारे द्वारा अपनाए गए संविधान की आधारशिला पर हमारे लोकतंत्र का भवन निर्मित हुआ है।” उन्होंने कहा कि इस लोकतांत्रिक ढांचे ने हमें ऐसी संस्थाओं का निर्माण करने में सक्षम बनाया, जो न केवल जनता की भागीदारी सुनिश्चित करती हैं, बल्कि शासन प्रणाली को भी मजबूती प्रदान करती हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि हमारे लिए हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सर्वोपरि है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और संवर्धन के लिए सदैव तत्पर रहें।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का महत्व
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने अतीत की पीड़ाओं को भी याद किया। उन्होंने कहा, “अतीत को देखते हुए, हमें देश के विभाजन से हुई पीड़ा को कदापि नहीं भूलना चाहिए।”
उन्होंने इस अवसर पर विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह दिवस हमें स्वतंत्रता के साथ जुड़े संघर्षों और बलिदानों की याद दिलाता है, और हमें एकजुट रहने की प्रेरणा देता है।
संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि हमारे देश ने लोकतंत्र पर आधारित ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया है, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं। न्यायपालिका, संसद, निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाएं इस बात का प्रमाण हैं कि हम संविधान की भावना के अनुरूप आगे बढ़ रहे हैं।
देशवासियों के लिए संदेश
राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि हमें मिलकर देश को विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं और तकनीक, शिक्षा व नवाचार के क्षेत्र में भारत को अग्रणी बनाएं।
निष्कर्ष:
राष्ट्रपति मुर्मू का यह संबोधन न केवल स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को और भी सार्थक बनाता है, बल्कि हमें यह भी याद दिलाता है कि लोकतंत्र और संविधान हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। विभाजन की पीड़ा से मिली सीख हमें एक मजबूत और एकजुट भारत के निर्माण की ओर अग्रसर करती है।


