अयोध्या: के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि से जुड़ा विवाद अब नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार को विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी। सूत्रों के अनुसार इस रिपोर्ट में कई अहम सिफारिशें की गई हैं, जिनमें एफआईआर दर्ज करना, ट्रस्ट के पुनर्गठन पर विचार करना और मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को CEO नियुक्त करना शामिल है।
रिपोर्ट गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी गई है। लगभग 20 पन्नों की इस रिपोर्ट में 150 से अधिक लोगों से पूछताछ के आधार पर तैयार किए गए निष्कर्ष शामिल हैं। SIT ने अपनी जांच के दौरान मंदिर प्रशासन, चढ़ावे के प्रबंधन और वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत पड़ताल की।
सूत्रों का दावा है कि जांच के दौरान कई ऐसी जानकारियां सामने आईं, जिन्होंने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। यही कारण है कि जांच टीम ने पिछले पांच वर्षों में प्राप्त चढ़ावे और दान की राशि का स्वतंत्र ऑडिट कराने की सिफारिश की है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंदिर में प्राप्त धन और बहुमूल्य वस्तुओं का उपयोग किस प्रकार किया गया।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर राम मंदिर प्रशासन में भी एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जाए। माना जा रहा है कि इस पद पर किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की नियुक्ति की जा सकती है, जो वित्तीय और प्रशासनिक गतिविधियों की निगरानी करेगा।
इस पूरे मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब आरोपों की उंगली ट्रस्ट के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों की ओर उठ रही है, तो अब तक उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दूसरी ओर, श्रीराम सेना समेत कई हिंदू संगठनों ने भी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। संगठन के पदाधिकारियों ने राम जन्मभूमि थाने में ज्ञापन सौंपकर एफआईआर दर्ज करने और आरोपियों के नार्को टेस्ट की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

जांच के दौरान एक और बड़ा दावा सामने आया है। विश्व सिंधी सेवा संगम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजू मनवानी ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 में सिंधी समाज की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट को 200 किलो चांदी की ईंटें दान में दी गई थीं, लेकिन आज तक उनका कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया। इससे दानदाताओं के बीच भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।
इसके अलावा धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने दावा किया है कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश-विदेश से लाई गई 1250 सोने-चांदी और अष्टधातु की पूजित शिलाओं का भी कोई स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां इन पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।
SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि मामले की गहराई से जांच अभी बाकी है। टीम ने विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा है। राज्य सरकार अब इस रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और जरूरत पड़ने पर इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई और ट्रस्ट से जुड़े संभावित फैसले लिए जा सकते हैं।
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस तरह के आरोप और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद देशभर के राम भक्तों की निगाहें अब सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


