नई दिल्ली: देश में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 को लेकर सोशल मीडिया और अलग-अलग माध्यमों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की ओर से सामने आई जानकारी लोगों के लिए राहत देने वाली है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन या नया खतरनाक वेरिएंट सामने नहीं आया है।
ICMR के अनुसार, इस समय देश में पाया जा रहा इन्फ्लूएंजा-A यानी H1N1 pdm09 वायरस पहले से मौजूद वायरस ही है। रिपोर्ट में इसे A/Missouri/11/2025 (H1N1) pdm09-like वायरस के तौर पर बताया गया है। यह वायरस क्लेड 6B.1A.5a2a और सब-क्लेड D.3.1.1 समूह से संबंधित है।
2025 से मौजूद है वायरस
ICMR के वैज्ञानिकों के मुताबिक, जिस वायरस को लेकर इस समय चिंता जताई जा रही है, वह अचानक सामने आया कोई नया स्ट्रेन नहीं है। यह वायरस 2025 से ही भारत में मौजूद है।
इसका मतलब यह है कि H1N1 के मामलों को लेकर घबराने के बजाय बीमारी के सामान्य लक्षणों और गंभीर संक्रमण के संकेतों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि बीमारी को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाए। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों में फ्लू के लक्षण गंभीर हो सकते हैं।
क्या मौजूदा फ्लू वैक्सीन काम करेगी?
H1N1 को लेकर सबसे बड़ा सवाल वैक्सीन की प्रभावशीलता को लेकर भी है। ICMR के वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत में इस समय मौजूद वायरस उत्तरी गोलार्ध के लिए तैयार की गई मौसमी फ्लू वैक्सीन में शामिल वायरस से मेल खाता है।
इसलिए वैक्सीन इस वायरस से बचाव में मदद कर सकती है। हालांकि, किसी भी वैक्सीन की तरह फ्लू वैक्सीन भी संक्रमण को हर परिस्थिति में पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देती। इसका उद्देश्य बीमारी और गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करना है।

ज्यादातर मरीज कुछ दिनों में हो जाते हैं ठीक
मौसमी इन्फ्लूएंजा आमतौर पर एक सीमित अवधि में ठीक होने वाली बीमारी है। बहुत से मरीजों में बुखार, खांसी, सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं और वे आराम तथा पर्याप्त तरल पदार्थ लेने से स्वस्थ हो जाते हैं।
लेकिन हर मरीज का संक्रमण एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए केवल यह सोचकर लापरवाही करना सही नहीं है कि फ्लू अपने आप ठीक हो जाएगा।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
H1N1 संक्रमण के दौरान कुछ समूहों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोग शामिल हैं।
इन लोगों में संक्रमण के कारण सांस से जुड़ी परेशानी या अन्य जटिलताओं का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।
इसलिए यदि इन समूहों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें, तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
ये 3 संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
H1N1 या किसी भी फ्लू के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात गंभीर लक्षणों को पहचानना है।
पहला संकेत—सांस लेने में परेशानी:
अगर मरीज को सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलना या सीने में असहजता महसूस हो, तो इसे सामान्य फ्लू समझकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए।
दूसरा संकेत—लक्षणों का लगातार बिगड़ना:
यदि बुखार, खांसी या कमजोरी कुछ दिनों के बाद कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
तीसरा संकेत—बेहद ज्यादा कमजोरी या असामान्य व्यवहार:
मरीज में अत्यधिक कमजोरी, असामान्य सुस्ती, भ्रम या सामान्य गतिविधियों में अचानक गंभीर गिरावट दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में ऐसे संकेत दिखाई देने पर देरी नहीं करनी चाहिए।
सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां रख रही नजर
H1N1 को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। वायरस के स्वरूप, संक्रमण के पैटर्न और उसके प्रभाव पर नजर रखी जाती है ताकि यदि वायरस में कोई महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए तो समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
फिलहाल ICMR की जानकारी के अनुसार भारत में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है। इसलिए अफवाहों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है।
बचाव के लिए क्या करें?
फ्लू से बचने के लिए सामान्य सावधानियां काफी महत्वपूर्ण हैं। हाथों की नियमित सफाई, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना, बीमार व्यक्ति के बहुत करीब जाने से बचना और पर्याप्त आराम करना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है।
फ्लू जैसे लक्षण होने पर दूसरों के संपर्क को कम रखना भी जरूरी है, खासकर घर में मौजूद छोटे बच्चों और बुजुर्गों के मामले में।
वैक्सीन लेने को लेकर व्यक्ति को अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और जोखिम के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

