हल्द्वानी, उत्तराखंड: सोशल मीडिया पर अपनी वीडियो और व्लॉग के लिए पहचानी जाने वाली यूट्यूबर नीतू बिष्ट इन दिनों एक वायरल रील को लेकर विवादों में घिर गई हैं। मां काली का स्वरूप धारण करके सड़क पर घूमने और मोमोज खाते हुए उनका वीडियो सामने आने के बाद हल्द्वानी में विरोध शुरू हो गया है। करणी सेना ने इस वीडियो पर आपत्ति जताते हुए पुलिस से शिकायत की है और नीतू बिष्ट के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
इस मामले ने सोशल मीडिया पर धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल, कंटेंट बनाने की जिम्मेदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां शिकायतकर्ता वीडियो को धार्मिक आस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला बता रहे हैं, वहीं अब सबकी नजर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है। हालांकि, शिकायत दर्ज कराने की मांग और FIR दर्ज होने में अंतर है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है या नहीं।
क्या है नीतू बिष्ट की वायरल रील का पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत नीतू बिष्ट की उस रील से हुई, जिसमें वह मां काली के रूप में तैयार होकर सार्वजनिक स्थान पर घूमती दिखाई देती हैं। वीडियो के अलग-अलग हिस्सों में वह लोगों से बातचीत करती नजर आती हैं। एक दृश्य में वह बच्चों से नमस्ते करने के लिए कहती दिखाई देती हैं, जबकि दूसरे हिस्से में इसी वेशभूषा में मोमोज खाते हुए नजर आती हैं।
वीडियो सामने आने के बाद कुछ लोगों ने इस प्रस्तुति पर नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि देवी के धार्मिक स्वरूप को इस तरह मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करना श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। इसके बाद मामला सोशल मीडिया से निकलकर हल्द्वानी कोतवाली तक पहुंच गया।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि वीडियो को लेकर सामने आई आपत्तियां शिकायतकर्ताओं के आरोप हैं। किसी भी कानूनी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वीडियो के संदर्भ, उद्देश्य और पूरी परिस्थितियों की जांच आवश्यक है।
करणी सेना ने पुलिस से क्या मांग की?
मामले को लेकर करणी सेना के पदाधिकारी और कार्यकर्ता हल्द्वानी कोतवाली पहुंचे। संगठन की महिला जिला अध्यक्ष योगिता बनोला के नेतृत्व में पुलिस को शिकायती पत्र सौंपा गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि नीतू बिष्ट ने मां काली के स्वरूप को आपत्तिजनक तरीके से प्रस्तुत किया है।
संगठन ने पुलिस से मामले की जांच कराने और संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग ऐसे वीडियो देखते हैं, इसलिए धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते समय उनकी गरिमा और लोगों की आस्था का ध्यान रखना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने नाराजगी भी जताई। उनका कहना है कि लोकप्रियता या सोशल मीडिया पर अधिक दर्शक जुटाने के लिए धार्मिक विषयों को विवादास्पद तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

बच्चों को डराने का भी लगाया गया आरोप
इस विवाद में केवल मोमोज खाने वाले दृश्य पर ही आपत्ति नहीं जताई गई है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मां काली के स्वरूप में सार्वजनिक स्थानों पर घूमने से कुछ बच्चे डर सकते हैं और आम लोगों में असहजता पैदा हो सकती है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है। वीडियो में किसी व्यक्ति की वेशभूषा या व्यवहार को लेकर शिकायत किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोप स्वतः साबित हो जाते हैं। पुलिस को उपलब्ध वीडियो, शिकायत और अन्य तथ्यों के आधार पर मामले का आकलन करना होगा।
यही वजह है कि फिलहाल इस घटना को धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप से जुड़ा विवाद कहना अधिक उचित है। अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
BNS और IT एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
करणी सेना ने शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, किसी कानून के तहत कार्रवाई होगी या नहीं, यह जांच में सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित प्रावधानों की कानूनी शर्तों पर निर्भर करेगा।
सिर्फ शिकायत दिए जाने से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। पुलिस को यह देखना होगा कि वीडियो में क्या दिखाया गया है, उसे किस संदर्भ में बनाया गया और क्या किसी लागू कानून का उल्लंघन हुआ है।
यदि जांच में किसी अपराध के पर्याप्त आधार मिलते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज होने, जांच शुरू होने और अदालत में दोष सिद्ध होने की प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं।
कौन हैं यूट्यूबर नीतू बिष्ट?
नीतू बिष्ट सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, यूट्यूबर और व्लॉगर हैं। वह इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। उनके कंटेंट में लाइफस्टाइल, मनोरंजन, शॉर्ट वीडियो और पारिवारिक व्लॉग शामिल हैं। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं, जिसके कारण उनसे जुड़ी घटनाएं तेजी से चर्चा में आ जाती हैं।
उनके पति लखन अर्जुन रावत भी सोशल मीडिया कंटेंट बनाते हैं। दोनों की डिजिटल दुनिया में अच्छी पहचान है। इस बार मां काली के स्वरूप में बनाई गई रील ने नीतू बिष्ट को एक अलग तरह के विवाद के केंद्र में ला दिया है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि हल्द्वानी पुलिस शिकायत पर क्या कदम उठाती है। वीडियो की जांच, शिकायत में दिए गए तथ्यों और संबंधित कानूनों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सोशल मीडिया पर धार्मिक प्रतीकों को मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत करते समय रचनात्मक स्वतंत्रता और धार्मिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
एक ओर कंटेंट क्रिएटर्स को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है, वहीं दूसरी ओर किसी संभावित कानूनी उल्लंघन की जांच करना संबंधित अधिकारियों का काम है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना जरूरी है। अब देखना होगा कि नीतू बिष्ट की वायरल रील से शुरू हुआ यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है।


