लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों को लेकर केंद्र सरकार की ओर से सराहना की गई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासनिक सुधारों और सरकारी कर्मचारियों के क्षमता विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। उन्होंने राज्य को दूसरे प्रदेशों के लिए एक उदाहरण बताते हुए कहा कि बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
लखनऊ में 23 और 24 अक्टूबर को आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में मिशन कर्मयोगी, सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और प्रशासन को नागरिक-केंद्रित बनाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में आठ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही। कार्यशाला का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करने के लिए व्यावहारिक रास्ते तलाशना था।
मिशन कर्मयोगी में यूपी की उपलब्धि पर चर्चा
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासनिक सुधारों का उद्देश्य केवल सरकारी नियमों में बदलाव करना नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना भी है जिसमें आम नागरिकों का भरोसा बढ़े। सरकारी सेवाएं सरल हों, शिकायतों का समाधान समय पर हो और अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट हो।
उन्होंने मिशन कर्मयोगी के तहत उत्तर प्रदेश के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य ने क्षमता विकास और प्रशिक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर प्रदेश के 19 लाख से अधिक कार्मिकों का पंजीकरण इसी दिशा में एक प्रमुख कदम है।
मिशन कर्मयोगी का लक्ष्य सरकारी कर्मचारियों को उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों के अनुरूप कौशल प्रदान करना है। इसके तहत कर्मचारी ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रशासन, तकनीक, नेतृत्व, व्यवहार और सार्वजनिक सेवा से जुड़े विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।

19 लाख से अधिक कार्मिक, 3.75 करोड़ पाठ्यक्रम पूरे
कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने बताया कि प्रदेश में iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 19 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक पंजीकृत हैं। उनके अनुसार, इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 3.75 करोड़ पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं और 47 करोड़ से अधिक लर्निंग आवर्स दर्ज हुए हैं।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए डिजिटल माध्यम का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। ऑनलाइन प्रशिक्षण के कारण कर्मचारी अपनी भूमिका और जरूरत के अनुसार अलग-अलग विषयों का अध्ययन कर सकते हैं।
हालांकि, प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता केवल पंजीकरण या पाठ्यक्रम पूरा करने की संख्या से तय नहीं होती। इसका महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि प्रशिक्षण से अधिकारियों के कामकाज, निर्णय लेने की क्षमता और आम नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं में कितना सुधार आता है।
350 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान भी जुड़े
उत्तर प्रदेश में क्षमता विकास को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण संस्थानों को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। कार्यशाला में बताया गया कि प्रदेश के 350 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान और प्रशिक्षण इकाइयां उन्नति पोर्टल पर पंजीकृत हैं।
इन संस्थानों का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को आधुनिक जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षित करना है। प्रशिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संस्थागत नेतृत्व, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जैसे विषयों को शामिल करना भी इसी बदलाव का हिस्सा है। तकनीक के उचित उपयोग से सरकारी कामकाज में तेजी लाने और प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
नियमों से आगे बढ़कर जिम्मेदारी आधारित प्रशासन
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में नियमों के साथ-साथ अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी को महत्व देने की जरूरत पर जोर दिया। इस सोच को ‘रूल बेस्ड’ से ‘रोल बेस्ड’ कार्यप्रणाली की ओर बढ़ने के रूप में समझा जा सकता है।
इसका अर्थ है कि सरकारी कर्मचारी केवल निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी जिम्मेदारी, नागरिकों की जरूरत और अपेक्षित परिणामों को भी ध्यान में रखें। मिशन कर्मयोगी के तहत भूमिका आधारित प्रशिक्षण इसी दिशा में काम करता है।
कार्यशाला में क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने भी कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सक्षम, दक्ष और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवाओं की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशिक्षण की गुणवत्ता और कर्मचारियों में सेवा भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।
डिजिटल सेवाओं से आम लोगों को क्या फायदा?
प्रशासनिक सुधारों का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं देना है। कार्यशाला में डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र, केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे कदमों का भी उल्लेख किया गया।
डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र के माध्यम से पेंशनभोगियों को अपनी पहचान प्रमाणित करने की प्रक्रिया में सुविधा मिल सकती है। वहीं, ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली नागरिकों को अपनी समस्याएं दर्ज कराने और उनके समाधान की स्थिति जानने का माध्यम देती है।
सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता, दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रियाओं को सरल बनाना और प्रशिक्षण के जरिए कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना भी व्यापक प्रशासनिक सुधारों का हिस्सा हैं।
हालांकि, इन पहलों का वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा जब नागरिकों को सेवाएं समय पर मिलें, शिकायतों का प्रभावी समाधान हो और सरकारी प्रक्रियाएं सभी के लिए सुलभ रहें।


