उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान : उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा आयोजित आवासीय दश-दिवसीय सरल संस्कृत भाषा शिक्षार्थी प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ संस्थान परिसर में वैदिक परंपराओं और संस्कृतमय वातावरण के बीच संपन्न हुआ। उद्घाटन सत्र में शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं प्रशिक्षुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का आरंभ संस्थानगीतिका के सस्वर पाठ से हुआ, जिसे सविता मौर्या ने प्रस्तुत किया। इसके पश्चात योजना समन्वयक डॉ. अनिल गौतम ने समागत अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया। इस अवसर पर मुख्य समागत अतिथि के रूप में राधा कृष्ण माध्यमिक संस्कृत विद्यालय, बलरामपुर से पधारे अनिल कुमार द्विवेदी उपस्थित रहे। सत्र का संचालन सविता मौर्या द्वारा किया गया।

वैदिक मंगलाचरण का पाठ प्रशिक्षु हर्षित ने तथा लौकिक मंगलाचरण का पाठ प्रशिक्षु शिवानी ने किया, जिससे कार्यक्रम को पारंपरिक गरिमा प्राप्त हुई। स्वागत भाषण में डॉ. अनिल गौतम ने कहा कि यह प्रशिक्षण वर्ग संस्कृत शिक्षार्थियों के शैक्षिक सशक्तीकरण और शिक्षण कौशल के विकास की दिशा में एक सार्थक पहल है।
प्रास्ताविक वक्तव्य में प्रशिक्षिका राधा शर्मा ने प्रशिक्षण की उद्देश्यपूर्ण रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह दस दिवसीय आवासीय कार्यक्रम संस्कृत के गहन अध्ययन, अनुशासन और नवाचार को बढ़ावा देगा। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दिनेश कुमार मिश्र एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ. जगदानन्द झा ने अपने वक्तव्यों में संस्कृत की समकालीन उपयोगिता और इसके संरक्षण-संवर्धन पर बल दिया।

प्रशिक्षण विशेष कथन में प्रशिक्षक धीरज मैठाणी ने कहा कि यह प्रशिक्षण शिक्षार्थियों के आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और अध्यापन दक्षता को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा। इस अवसर पर प्रशिक्षु आकांक्षा चौहान ने भी अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस प्रकार के आवासीय प्रशिक्षण वर्ग संस्कृत के प्रति नई दृष्टि और प्रेरणा प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में योजना प्रभारी भगवान सिंह चौहान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र का समापन प्रशिक्षु नंदिनी द्वारा शान्तिमंत्र के सस्वर पाठ के साथ किया गया।


