बरेली। अयोध्या के महंत राजूदास द्वारा मुसलमानों को भारत से बाहर निकालने संबंधी बयान पर देशभर में विवाद बढ़ता जा रहा है। इसी को लेकर बरेली की ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महंत राजूदास एक धार्मिक और समाज में प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं, इसलिए उन्हें ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।
मौलाना ने कहा कि भारत का 1947 में एक बार बंटवारा हो चुका है, और दोबारा बंटवारे की भाषा समाज और देश दोनों के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने सवाल उठाया—“अगर मुसलमानों को देश से बाहर निकालने की बात की जा रही है, तो उन्हें आखिर भेजा कहां जाएगा? भारत में करीब 30 करोड़ मुसलमान रहते हैं, इतनी बड़ी आबादी को कोई भी देश स्वीकार नहीं करेगा।”
अब पढ़िए—महंत राजूदास का पूरा विवादित बयान क्या था?
महंत राजूदास बुधवार को झांसी में बुंदेलखंड गौरव फाउंडेशन द्वारा आयोजित महारानी लक्ष्मीबाई जयंती कार्यक्रम में शामिल हुए थे। यहां उन्होंने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन एकता यात्रा का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग गलत नहीं है।
राजूदास ने कहा कि सनातनियों को “धर्म की रक्षा के लिए एक होना पड़ेगा।”
उन्होंने दिल्ली धमाके के संदर्भ में कहा कि “जितने भी पढ़े-लिखे इस्लामिक हैं, सब के सब आतंकवादी हैं।” उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई।
इसके साथ ही उन्होंने मदरसों पर बुलडोजर चलाने, शिक्षा प्रणाली में बदलाव और मुसलमानों को भारत से बाहर भेजने जैसी विवादित बातें भी कहीं, जिन्हें कई संगठनों, नेताओं और समुदायों ने खतरनाक और उकसाने वाला बताया है।
RDX मिलने का दावा भी किया
महंत राजूदास ने कहा कि सनातन एकता यात्रा के दौरान जहां वे रुके थे, वहां के पास RDX बरामद हुआ था। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली धमाके में शामिल एक डॉक्टर और लखनऊ से गिरफ्तार महिला डॉक्टर का “आतंकी कनेक्शन” था। बयान देते हुए उन्होंने पूरी मुस्लिम समुदाय पर आरोप लगाने वाले कई कथन भी कहे, जिन्हें विशेषज्ञ समूहों ने सामुदायिक तनाव बढ़ाने वाला बयान बताया।
मौलाना शहाबुद्दीन का पलटवार—“इतिहास को मत दोहराइए”
मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने राजूदास के बयानों को “बेहद गैर-जरूरी और देश की एकता के खिलाफ” बताया। उन्होंने कहा—
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“भारत सभी धर्मों का घर है।
अगर मुसलमानों को बाहर भेजने की बात होगी, तो आखिर इतनी बड़ी आबादी को कौन स्वीकार करेगा?” -
“अखंड भारत की बात करने वाले पहले यह बताएं कि इतनी आबादी को बाहर भेजकर किस तरह की अखंडता बनेगी?”
उन्होंने कहा कि ऐसे बयान समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करते हैं और धार्मिक नेताओं को देश की एकता को मजबूत करना चाहिए, न कि विभाजनकारी बयान देने चाहिए।
सनातन एकता यात्रा और महंत की दलील
6 से 16 नवंबर तक चली पंडित धीरेंद्र शास्त्री की सनातन एकता पदयात्रा में भी महंत राजूदास शामिल रहे।
उन्होंने कहा कि विभिन्न धर्मों—जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई, सिख, यहूदी—की जड़ें भारत की संस्कृति में हैं और धार्मिक परिवर्तन ऐतिहासिक आक्रमणों का परिणाम हैं।
उनका कहना था कि मदरसों में धार्मिक शिक्षा के बजाय भूगोल, इतिहास और समाजशास्त्र पढ़ाया जाए, अन्यथा “समाज को नुकसान होगा।” उनके इस बयान को भी कई संगठन संवेदनशील और भड़काऊ मान रहे हैं।


