ढाका | बांग्लादेश में शेख हसीना विरोधी छात्र नेता उस्मान हादी की मौत के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़क उठी है। इस हिंसा के दौरान एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसमें ढाका के पास भालुका इलाके में एक हिंदू युवक को पीट-पीटकर मार डाला गया और बाद में उसके शव को नग्न अवस्था में पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई।
बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक मृतक की पहचान दीपू चंद्र दास के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि यह घटना गुरुवार रात की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक उग्र भीड़ युवक को प्रताड़ित करती दिख रही है और इस दौरान धार्मिक नारे लगाए जा रहे हैं।
धर्म अपमान का आरोप, भीड़ ने की मॉब लिंचिंग
भालुका पुलिस स्टेशन के ड्यूटी ऑफिसर ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि दीपू चंद्र दास पर धर्म का अपमान करने का आरोप लगाया गया था।
पुलिस के अनुसार—
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गुरुवार रात करीब 9 बजे भीड़ ने युवक को पकड़ा
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बेरहमी से पिटाई की गई
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बाद में उसे नग्न कर पेड़ से लटका दिया गया
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फिर शव को आग के हवाले कर दिया गया
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। शव को मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुर्दाघर में भेजा गया है। फिलहाल पुलिस मृतक के परिवार का पता लगाने में जुटी है।
उसमन हादी की मौत से फैली हिंसा
उसमन हादी, शेख हसीना के खिलाफ जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे।
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12 दिसंबर को चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें सिर में गोली मारी गई
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इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया
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6 दिन बाद उनकी मौत हो गई
हादी की मौत की खबर फैलते ही बांग्लादेश के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए।
न्यूज चैनल और अखबारों पर हमले
हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने—
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देश के प्रमुख अखबार द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के दफ्तरों में घुसकर
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तोड़फोड़
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आगजनी
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पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान के आवास में भी नुकसान पहुंचाया
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अवामी लीग के कार्यालय को आग के हवाले कर दिया
स्थिति को देखते हुए कई इलाकों में सेना की तैनाती की गई है।
अंतरिम सरकार और यूनुस की प्रतिक्रिया
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पत्रकारों और आम नागरिकों पर हमलों की कड़ी निंदा की है। सरकार ने कहा कि—
“बांग्लादेश लोकतांत्रिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, इसमें हिंसा और नफरत के लिए कोई जगह नहीं है।”
वहीं, मुहम्मद यूनुस ने हिंदू युवक की हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
“नए बांग्लादेश में ऐसी बर्बर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”
पत्रकार की हत्या से हालात और गंभीर
इसी बीच, खुलना में पत्रकार इमदादुल हक मिलन की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक हमलावर बाइक से आए और फायरिंग कर फरार हो गए। इस घटना ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।
निष्कर्ष:
उसमन हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में फैली हिंसा ने धार्मिक अल्पसंख्यकों, मीडिया और लोकतांत्रिक संस्थानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हिंदू युवक की नृशंस हत्या और मीडिया संस्थानों पर हमले देश में कानून-व्यवस्था की चुनौती को उजागर करते हैं। अंतरिम सरकार के लिए यह एक कठिन परीक्षा है कि वह हिंसा पर सख्ती से काबू पाए और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाए।


