लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 31 जुलाई 2026 से पेपरलेस वर्किंग (E-Office System) की शुरुआत कर दी है। विश्वविद्यालय के 69वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने ई-ऑफिस का शुभारंभ किया और इसे डिजिटल प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
दीक्षांत समारोह का आयोजन किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में किया गया। इस दौरान कुल 1,25,239 विद्यार्थियों को डिजिटल डिग्रियां प्रदान की गईं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, अब शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा।
44 देशों के छात्र कर रहे हैं पढ़ाई
कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी ने बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। वर्तमान में यहां 44 देशों के छात्र-छात्राएं विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में—
- 93,536 स्नातक छात्र
- 31,006 परास्नातक छात्र
- 419 डिप्लोमा विद्यार्थी
- 30 ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम के छात्र
शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा 248 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की गई।
111 मेधावियों को मिले 204 पदक
दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए कुल 204 पदक वितरित किए गए। इनमें 111 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया, जिनमें 80 छात्राएं और 31 छात्र शामिल रहे।
हालांकि, समारोह के बाद कुछ गोल्ड मेडल विजेताओं ने नाराजगी भी जताई। उनका कहना था कि केवल चांसलर मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ही मुख्य मंच पर सम्मानित किया गया, जबकि अन्य स्वर्ण पदक विजेताओं को अलग से सम्मान दिया गया।
राज्यपाल ने दिए कई अहम निर्देश
अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को कई महत्वपूर्ण सुझाव और निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि विश्वविद्यालय पूरी तरह डिजिटल प्रशासन अपनाए और अगले एक-दो महीनों में अधिकतम कार्य ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से किए जाएं।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अगले वर्ष से छात्रों को डिग्रियों की हार्ड कॉपी देना बंद कर दिया जाए और पूरी प्रक्रिया डिजिटल बनाई जाए।
हॉस्टल और लाइब्रेरी व्यवस्था पर जताई नाराजगी
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में छात्रावासों की व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में 9 छात्रावास और 9 छात्राएं छात्रावास होने के बावजूद अभी तक कई छात्रों को हॉस्टल आवंटित नहीं किए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि—
- कई छात्रावासों में मेस शुरू नहीं हुई है।
- कुछ हॉस्टलों में वाई-फाई और वॉशिंग मशीन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
- पुस्तकालय का समय बढ़ाकर शनिवार और रविवार को भी खोलने पर विचार किया जाना चाहिए।
सामाजिक मुद्दों पर भी दिया संदेश
अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल ने शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी जोर दिया।
उन्होंने दहेज प्रथा, महिलाओं के खिलाफ अपराध, नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर छात्रों से खुलकर संवाद किया।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि यदि विवाह में दहेज की मांग हो तो उसका विरोध करें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में आगे आएं।
साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए जाने वाले नशामुक्ति अभियान में छात्रों की सक्रिय भागीदारी का भी आह्वान किया।
ई-ऑफिस से बढ़ेगी पारदर्शिता
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि ई-ऑफिस लागू होने से फाइलों की प्रक्रिया तेज होगी, कागज की खपत कम होगी और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी।
डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन से छात्रों को प्रमाणपत्र, आवेदन और अन्य शैक्षणिक सेवाएं भी पहले की तुलना में अधिक तेजी से उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
पुस्तकों का भी हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखी गई कई नई पुस्तकों का विमोचन भी किया। इनमें पर्यावरण, साहित्य, खेल विज्ञान और मंचीय कविता से संबंधित पुस्तकें शामिल रहीं।
इसके अलावा विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए परिषदीय विद्यालयों के बच्चों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर समारोह को सांस्कृतिक रंग भी दिया।


