मध्य प्रदेश: के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर वर्षों से चला आ रहा हिंदू-मुस्लिम विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। बसंत पंचमी के दिन पूरे समय पूजा की अनुमति को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने संतुलन साधते हुए दोनों पक्षों को सीमित समय और स्थान में धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ — जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली — ने आदेश दिया कि:
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बसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा कर सकेगा
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मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज की अनुमति होगी
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दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग स्थान और अलग रास्ते सुनिश्चित किए जाएंगे
पीठ ने साफ कहा कि आपसी सम्मान, सहयोग और शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
🚨 कानून-व्यवस्था पर सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
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प्रशासन श्रद्धालुओं की संख्या के अनुसार पास सिस्टम लागू कर सकता है
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किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाएं
🏛️ ASI सर्वे और हाई कोर्ट को अहम निर्देश
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के वैज्ञानिक सर्वे पर भी अहम टिप्पणी की।
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हाई कोर्ट के आदेश पर वैज्ञानिक सर्वे पूरा हो चुका है
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रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद लिफाफे में हाई कोर्ट के पास है
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सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि
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रिपोर्ट खुली अदालत में खोली जाए
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दोनों पक्षों को रिपोर्ट की कॉपी दी जाए
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अगर कोई हिस्सा गोपनीय है, तो वकीलों की मौजूदगी में निरीक्षण की अनुमति मिले
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इसके बाद दोनों पक्षों को 2 हफ्ते में आपत्तियां और सुझाव दाखिल करने का मौका मिलेगा।
⏳ तेज सुनवाई का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धार भोजशाला से जुड़ी रिट याचिका पर हाई कोर्ट की वरिष्ठतम डिवीजन बेंच द्वारा
👉 संभव हो तो दो हफ्ते के भीतर सुनवाई शुरू की जाए।
❓ सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा मामला?
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हिंदू पक्ष ने 20 जनवरी को याचिका दाखिल कर
👉 बसंत पंचमी पर पूरे दिन अखंड सरस्वती पूजा की मांग की -
इस साल बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही थी
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शुक्रवार को भोजशाला में जुमे की नमाज होती है
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इसी टकराव के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
🛕 क्या है धार भोजशाला विवाद?
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भोजशाला एक ASI संरक्षित स्मारक है
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हिंदू पक्ष इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानता है
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मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यहां मौलाना कमालुद्दीन की मस्जिद है
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18वीं सदी में अंग्रेजों की खुदाई में सरस्वती की प्रतिमा मिली थी
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यह प्रतिमा आज भी लंदन संग्रहालय में मौजूद है
वर्तमान व्यवस्था के तहत:
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हिंदू — हर मंगलवार पूजा
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मुस्लिम — हर शुक्रवार नमाज
🛡️ सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के मद्देनज़र धार में सुरक्षा चाक-चौबंद है।
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8,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात
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सीसीटीवी से 24×7 निगरानी
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संवेदनशील इलाकों में लगातार पेट्रोलिंग
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भोजशाला परिसर में
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वॉच टावर
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पुलिस चौकी
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अतिरिक्त बल की तैनाती
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🧾 निष्कर्ष:
धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक संतुलन और संवैधानिक मर्यादा का उदाहरण पेश किया है। पूजा और नमाज — दोनों को अनुमति देकर कोर्ट ने साफ कर दिया कि आस्था के साथ-साथ शांति और कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है। अब सभी की निगाहें हाई कोर्ट की अंतिम सुनवाई और ASI सर्वे रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस ऐतिहासिक विवाद की दिशा तय कर सकती है।


