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पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव: पीएम मोदी की कुवैत क्राउन प्रिंस से सीधी बात, होर्मुज पर बड़ा संकेत

पश्चिम एशिया: में बढ़ते तनाव और लगातार हो रहे हमलों के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता तेज कर दी है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की। इस बातचीत में क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर गंभीर चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत की शुरुआत में कुवैत के क्राउन प्रिंस को आगामी ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। इसके बाद दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर अपने विचार साझा किए। हाल के घटनाक्रमों को लेकर दोनों पक्षों ने गहरी चिंता व्यक्त की और क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता को लेकर सतर्कता जताई।

प्रधानमंत्री मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि भारत कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान करता है और उस पर हुए किसी भी हमले की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत हमेशा से शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थक रहा है।

बातचीत का एक अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य रहा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। प्रधानमंत्री ने इस मार्ग से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग को जरूरी बताया।

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत में रह रहे भारतीय समुदाय का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए कुवैत सरकार द्वारा दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। कुवैत में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार और पेशेवर रहते हैं, जो दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाते हैं।

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नहयान से भी फोन पर चर्चा की थी। उस दौरान भी उन्होंने आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले हमलों की कड़ी निंदा की थी और क्षेत्र में शांति की आवश्यकता पर जोर दिया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह सक्रिय कूटनीति उसके बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है। भारत न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता के प्रयासों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भारत की चिंता स्वाभाविक है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। ऐसे में इस मार्ग की सुरक्षा और संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी और कुवैत के क्राउन प्रिंस के बीच हुई यह बातचीत केवल एक औपचारिक संवाद नहीं थी, बल्कि इसमें कई महत्वपूर्ण रणनीतिक और कूटनीतिक संकेत छिपे हुए हैं। यह स्पष्ट है कि भारत इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की सक्रिय कूटनीति एक संतुलित और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति की भूमिका को दर्शाती है। पीएम मोदी की पहल यह संकेत देती है कि भारत न केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

News Desk

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