चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन सुरंग में पानी और भारी मलबा घुसने से हुए हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पीपलकोटी क्षेत्र में स्थित विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टनल में गुरुवार शाम अचानक पानी और मलबा आने के बाद वहां काम कर रहे मजदूर फंस गए। अधिकारियों के अनुसार हादसे के बाद 22 लोगों के फंसे होने की सूचना थी। इनमें से 12 घायलों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि सात लोगों की मौत की सूचना है और तीन लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
घटना के बाद से सुरंग के भीतर राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। SDRF, NDRF, ITBP, पुलिस और अन्य विशेषज्ञ टीमें मलबे और पानी के बीच फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के अंदर मौजूद मलबा, पानी, सीमित जगह और लगातार बदलती परिस्थितियां बनी हुई हैं।
अचानक पानी और मलबे ने बदला पूरा मंजर
प्रत्यक्षदर्शियों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरंग के भीतर अचानक तेज आवाज के साथ मलबा और पानी आने लगा। कुछ ही समय में सुरंग का हिस्सा मलबे और पानी से भर गया। वहां मौजूद श्रमिकों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोगों ने सुरक्षित स्थान की ओर निकलने की कोशिश की।
इस हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सुरंग के भीतर काम कर रहे लोगों को अचानक आई इस स्थिति से संभलने का मौका बेहद कम मिला। कई श्रमिक घायल हुए और कुछ मलबे की चपेट में आ गए।
हालांकि, घटनास्थल के मंजर को लेकर सामने आ रहे कई दावों की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्तर पर होना अभी बाकी है। इसलिए यह स्पष्ट रूप से कहना जल्दबाजी होगी कि हादसे से पहले कितने समय से मलबा गिर रहा था या परियोजना प्रबंधन को इसकी जानकारी थी।
22 लोगों के फंसे होने की सूचना
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार सुरंग के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण पानी और मलबा आने से अंदर मौजूद लोग प्रभावित हुए। शुरुआती जानकारी में 22 लोगों के फंसे होने की बात सामने आई थी।
बचाव अभियान के दौरान 12 घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया। वहीं सात लोगों की मौत की सूचना है और तीन लापता लोगों की तलाश अभी जारी है। बचाव दल लगातार सुरंग के अंदर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि राहत एवं बचाव अभियान जारी रहने के कारण प्रभावित लोगों के आंकड़ों में आवश्यकता के अनुसार बदलाव हो सकता है।

घायलों का अस्पताल में इलाज
रेस्क्यू किए गए घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिकांश घायलों का उपचार जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में किया जा रहा है, जबकि एक घायल को बेस अस्पताल श्रीनगर रेफर किया गया है।
रेस्क्यू टीमों के लिए भी सुरंग के भीतर परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। पानी और मलबे के बीच सीमित स्थान में काम करना जोखिम भरा है, इसलिए बचाव अभियान सावधानी और समन्वय के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
सात मजदूरों की मौत, तीन की तलाश
हादसे में सात मजदूरों की मौत की सूचना सामने आई है। मृतकों में अलग-अलग राज्यों के श्रमिक शामिल बताए गए हैं। वहीं तीन लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी है।
लापता लोगों को खोजने के लिए बचाव दल सुरंग के प्रभावित हिस्से में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। मलबे को हटाने और सुरंग के भीतर सुरक्षित रास्ता बनाने का काम भी अभियान का अहम हिस्सा है।
हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस दुर्घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माणाधीन सुरंगों में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना में इससे पहले भी सुरंग के भीतर दुर्घटना की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
परियोजना से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना 444 मेगावाट की परियोजना है और इसमें करीब 3 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल समेत कई बड़े निर्माण कार्य शामिल हैं।
हालांकि, ‘दो दिन से मलबा गिर रहा था और परियोजना प्रबंधन ने इसे नजरअंदाज किया’ जैसे आरोपों की अभी स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इस पहलू की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे से पहले कोई चेतावनी संकेत मौजूद थे या नहीं और यदि थे तो उन पर क्या कार्रवाई की गई।
बचाव अभियान पर टिकी निगाहें
हादसे के बाद SDRF और NDRF समेत कई एजेंसियों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है। ITBP और पुलिस की टीमें भी अभियान में सहयोग कर रही हैं। अधिकारियों का पूरा ध्यान पहले लापता लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने पर है।
सुरंग के अंदर पानी और मलबे की मौजूदगी के कारण अभियान लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बचावकर्मियों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि राहत अभियान के दौरान किसी और व्यक्ति की जान खतरे में न पड़े।
पुरानी घटना ने फिर बढ़ाई चिंता
विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना में पहले भी सुरंग से जुड़ी दुर्घटना सामने आ चुकी है। दिसंबर 2025 में परियोजना की सुरंग के भीतर दो लोको ट्रॉली के टकराने की घटना में कई श्रमिक घायल हुए थे।
अब पानी और मलबा घुसने से हुए इस बड़े हादसे के बाद परियोजना में सुरक्षा प्रोटोकॉल, निगरानी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की समीक्षा की जरूरत पर सवाल उठ रहे हैं।
चमोली के पीपलकोटी में निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना की सुरंग में पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हुआ है। सात मजदूरों की मौत और तीन के लापता होने की सूचना है, जबकि 12 घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। SDRF, NDRF, ITBP और अन्य एजेंसियां लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। हादसे से पहले मलबा गिरने की बात सामने आ रही है, लेकिन परियोजना प्रबंधन की कथित लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब जांच का अहम सवाल यही है कि क्या हादसे से पहले मौजूद संभावित खतरे के संकेतों पर पर्याप्त कार्रवाई की गई थी।


