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लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर बवाल! छात्रों की पिटाई पर अड़ा विपक्ष, स्पीकर ने दी शाम 5 बजे तक सहमति बनाने की मोहलत

लोकसभा: में सोमवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू होने से पहले ही भारी राजनीतिक टकराव देखने को मिला। विपक्षी सांसद छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और पिटाई के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए। लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण विधेयक पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी।

स्थिति को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सरकार और विपक्ष दोनों से आपसी सहमति बनाने की अपील की और शाम 5 बजे तक समाधान निकालने का समय दिया। इससे पहले सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।


चर्चा शुरू होने से पहले ही वेल में पहुंचे विपक्षी सांसद

दोपहर 2 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल में पहुंच गए। उनका कहना था कि छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज जैसे मुद्दों पर पहले चर्चा कराई जाए।

हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और विधेयक पर बहस शुरू नहीं हो पाई।


स्पीकर ओम बिरला ने क्या कहा?

लगातार हो रहे शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष से कहा कि यदि चर्चा ही नहीं होने दी जाएगी तो संसद की कार्यवाही प्रभावित होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों बैठकर सहमति बनाएं और शाम 5 बजे तक समाधान लेकर आएं, ताकि सदन में विधेयक पर सार्थक चर्चा हो सके।

हालांकि विपक्ष अपने रुख पर कायम रहा और हंगामा जारी रहने के कारण कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।


कई बार स्थगित हुई लोकसभा और राज्यसभा

सोमवार को संसद की कार्यवाही सुचारु नहीं चल सकी।

  • लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक स्थगित हुई।
  • इसके बाद 2 बजे तक स्थगन किया गया।
  • फिर हंगामा जारी रहने पर शाम 5 बजे तक कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

उधर राज्यसभा में भी विपक्ष के विरोध के कारण कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।


जितेंद्र सिंह ने पेश किया संशोधन विधेयक

सुबह केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया।

सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और संगठित परीक्षा अपराधों पर कड़ी रोक लगाना है।

प्रस्तावित संशोधन के तहत दोषियों के लिए पहले से अधिक कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।


2024 के कानून में होंगे बड़े बदलाव

सरकार द्वारा लाए गए संशोधन विधेयक में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।

इनमें प्रमुख हैं—

  • पेपर लीक के मामलों में कठोर दंड।
  • दोषियों पर भारी आर्थिक जुर्माना।
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का अधिकार।
  • मामलों की रोजाना सुनवाई की व्यवस्था।
  • केंद्रीय एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना।

यह कानून UPSC, SSC, रेलवे भर्ती, बैंकिंग परीक्षाओं, NTA और अन्य केंद्रीय भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं पर लागू होगा।


NEET विवाद के बाद आया संशोधन

सरकार यह संशोधन ऐसे समय लाई है जब NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों का बड़ा आंदोलन देखने को मिला था।

इसी विवाद के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने की घोषणा करते हुए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स गठित करने का भी ऐलान किया है।


संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान, NDA सांसदों ने किया स्वागत

इस्तीफे के बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने उनका शॉल और मिथिला पाग पहनाकर स्वागत किया तथा संसद भवन तक उनके साथ गए। इस दौरान “धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद” के नारे भी लगाए गए।

उधर विपक्ष ने इस स्वागत की आलोचना करते हुए इसे अनुचित बताया।


राजनीतिक टकराव के बीच परीक्षा सुधार पर टिकी निगाहें

संसद में जारी गतिरोध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा, परीक्षा प्रणाली और छात्र आंदोलनों का मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना रहेगा।

सरकार नए कानून को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाने से नहीं बल्कि निष्पक्ष जांच, जवाबदेही और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने से ही वास्तविक सुधार संभव होगा।

लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू होने से पहले ही संसद में विपक्ष और सरकार आमने-सामने आ गए। छात्रों की पिटाई के मुद्दे पर विपक्ष की बहस की मांग और एंटी पेपर लीक बिल पर सरकार की प्राथमिकता के बीच सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या राजनीतिक सहमति बन पाती है और संसद इस महत्वपूर्ण विधेयक पर विस्तृत चर्चा कर पाती है।

News Desk

Written by News Desk

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