अयोध्या। अयोध्या में भव्य राम मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक व्यवस्थित करने के लिए नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO के चयन की प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। 16 अभ्यर्थियों के आमने-सामने साक्षात्कार पूरे होने के बाद अब चयन समिति मेरिट के आधार पर तीन नामों का पैनल तैयार करने की प्रक्रिया में जुटी है।
हालांकि, अभी तक इन तीन नामों की आधिकारिक सूची श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नहीं सौंपी गई है। ऐसे में जिन नामों की चर्चा चल रही है, उन्हें फिलहाल संभावित दावेदार ही माना जा रहा है। अंतिम फैसला चयन समिति की सिफारिश और ट्रस्ट की मंजूरी के बाद ही होगा।
16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू के बाद अब तीन नामों पर नजर
राम मंदिर CEO के पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आने के बाद चयन प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों में से 16 अभ्यर्थियों के फेस-टू-फेस इंटरव्यू पूरे किए गए।
अब तीन सदस्यीय चयन समिति इन उम्मीदवारों के प्रदर्शन, प्रशासनिक अनुभव और मंदिर की भविष्य की व्यवस्थाओं को संभालने की क्षमता का आकलन कर रही है। इसी आधार पर तीन नामों का पैनल तैयार किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, समिति पैनल को ट्रस्ट के महासचिव के समक्ष रख सकती है। इसके बाद ट्रस्ट की बैठक में इस पर चर्चा होगी।
2 सितंबर की बैठक पर टिकी नजर
राम मंदिर CEO के चयन को लेकर 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। संभावना है कि चयन समिति की ओर से तैयार किए गए तीन नामों के पैनल पर इसी बैठक में विचार किया जाएगा।
हालांकि, अंतिम निर्णय ट्रस्ट के स्थायी सदस्यों के विचार-विमर्श और सहमति के बाद ही होने की उम्मीद है। इसलिए अभी किसी एक नाम को नया CEO मान लेना जल्दबाजी होगी।
CEO के चयन के साथ-साथ इस बैठक में मंदिर के प्रवक्ता की नियुक्ति और उनकी भूमिका से संबंधित दिशा-निर्देशों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

इन तीन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा
चयन प्रक्रिया के बीच जिन संभावित नामों की चर्चा सबसे अधिक हो रही है, उनमें पूर्व आईएएस योगेश्वर राम मिश्र, दिनेश चंद्र और पूर्व आईपीएस राजेश पांडेय प्रमुख बताए जा रहे हैं।
योगेश्वर राम मिश्र अयोध्या के जिलाधिकारी के रूप में काम कर चुके हैं। अयोध्या प्रशासन से जुड़े उनके अनुभव को देखते हुए उनका नाम CEO पद के संभावित दावेदारों में चर्चा में है।
वहीं दिनेश चंद्र जौनपुर के जिलाधिकारी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव उनके पक्ष में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीसरा नाम पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय का है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संभावित नामों में राजेश पांडेय के नाम की चर्चा सबसे ज्यादा बताई जा रही है।
लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि इन तीनों में से किसी भी नाम को अभी अंतिम नहीं माना जा सकता। चयन समिति की ओर से आधिकारिक पैनल और ट्रस्ट की मंजूरी के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
CEO की भूमिका क्यों अहम मानी जा रही है?
राम मंदिर के निर्माण और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मंदिर परिसर की व्यवस्थाएं भी लगातार विस्तार ले रही हैं। ऐसे में CEO की भूमिका केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहने वाली।
मंदिर की व्यवस्थाओं, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, भविष्य की योजनाओं और बड़े स्तर पर आने वाले श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारी की जरूरत मानी जा रही है।
यही वजह है कि चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों के प्रशासनिक अनुभव और बड़े स्तर की व्यवस्थाओं को संभालने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रवक्ता की नियुक्ति पर भी हो सकता है फैसला
2 सितंबर की बैठक सिर्फ CEO के चयन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है। मंदिर ट्रस्ट के प्रवक्ता की नियुक्ति और उनकी भूमिका को लेकर भी फैसला होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, राज परिवार से जुड़े यतींद्र मोहन मिश्र को ट्रस्टी बनाए जाने के साथ प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी दिए जाने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में भी अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक में ही होगा।
अंतिम मुहर के लिए अभी करना होगा इंतजार
राम मंदिर CEO के चयन को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है, लेकिन फिलहाल तीन संभावित नामों की चर्चा को आधिकारिक फैसला नहीं माना जा सकता। चयन समिति पहले तीन नामों का पैनल तैयार करेगी और उसके बाद ट्रस्ट इस पर अंतिम निर्णय लेगा।
इस पूरी प्रक्रिया में अब सबसे ज्यादा नजर 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक पर रहेगी। यदि उस बैठक में पैनल पर सहमति बनती है, तो राम मंदिर के नए CEO के नाम को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।
राम मंदिर CEO के चयन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। 16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया जाना है। पूर्व आईएएस योगेश्वर राम मिश्र, दिनेश चंद्र और पूर्व आईपीएस राजेश पांडेय के नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, लेकिन अभी कोई नाम अंतिम नहीं है। अब चयन समिति की सिफारिश और 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक के बाद ही तय होगा कि राम मंदिर की प्रशासनिक जिम्मेदारी किस अधिकारी को सौंपी जाती है।


