सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित दो मंजिला मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद एक ऐसा खुलासा हुआ, जिसने पूरे मामले को नई चर्चा में ला दिया है। प्रशासन द्वारा बुलडोजर कार्रवाई पूरी करने के बाद जब मलबा हटाया जा रहा था, तभी जमीन के नीचे एक पुराना और करीब 20 फीट गहरा कुआं मिला।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कुएं की चौड़ाई लगभग एक से सवा मीटर बताई जा रही है। कुएं के ऊपरी हिस्से पर पहले लिंटर डाला गया था, जिसके कारण वह बाहर से दिखाई नहीं देता था। मलबा हटाने के दौरान कुआं सामने आने के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी।
सुबह शुरू हुई थी बुलडोजर कार्रवाई
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित दो मंजिला मस्जिद को शनिवार सुबह प्रशासन ने ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की थी। कार्रवाई के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात किए गए थे।
जानकारी के मुताबिक, मस्जिद लगभग 315 वर्ग मीटर भूमि पर बनी हुई थी। ध्वस्तीकरण अभियान में कई बुलडोजर और डंपर लगाए गए। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
प्रशासन के अनुसार, नगर मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई।
मलबा हटाते समय सामने आया पुराना कुआं
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी होने के बाद जब मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा था, तभी कर्मचारियों को जमीन के नीचे कुएं जैसी संरचना दिखाई दी।
जांच में पता चला कि यह करीब 20 फीट गहरा कुआं है। कुएं के निचले हिस्से में मिट्टी भरी हुई बताई जा रही है। प्रशासनिक टीम इसे काफी पुराना मान रही है।
एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने कुआं मिलने की पुष्टि की। अधिकारियों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुएं के आसपास लोगों की आवाजाही रोक दी और पुलिस बल तैनात कर दिया।
प्रशासन का कहना है कि किसी भी दुर्घटना या अप्रिय स्थिति से बचने के लिए कुएं को सुरक्षित तरीके से ढकने और आसपास के क्षेत्र की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

पांच घंटे तक चली कार्रवाई
मस्जिद को ध्वस्त करने की कार्रवाई कई घंटे तक चली। रिपोर्ट के मुताबिक, ध्वस्तीकरण के लिए करीब सात बुलडोजर और 12 डंपर लगाए गए थे।
शुक्रवार रात से ही कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। शनिवार सुबह डंपर और जेसीबी मशीनें परिसर में पहुंचीं और इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई।
करीब पांच घंटे की कार्रवाई के बाद दो मंजिला ढांचा पूरी तरह गिरा दिया गया और मलबा हटाने का काम शुरू हुआ। इसी दौरान जमीन के नीचे दबा पुराना कुआं सामने आया।
कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
मामले को लेकर पहले प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया चली थी। शिकायत के बाद मामला नगर मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचा था।
शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि संबंधित ढांचा सरकारी भूमि पर बना हुआ है। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद कार्रवाई से जुड़ा आदेश दिया।
मस्जिद प्रबंधन पक्ष ने फैसले को चुनौती देते हुए दावा किया था कि धार्मिक स्थल काफी पुराना है और इसके समर्थन में दस्तावेज भी पेश किए गए। हालांकि, जिला जज की अदालत में याचिका खारिज होने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।
विपक्षी नेताओं ने उठाए सवाल
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की बात कही।
वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में उचित कानूनी प्रक्रिया और समान दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
कार्रवाई से पहले और उसके दौरान प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती। कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए।
अब सबसे बड़ा सवाल—कुआं कितना पुराना?
मस्जिद के मलबे के नीचे मिले इस कुएं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन इसे पुराना कुआं मान रहा है, लेकिन इसकी वास्तविक उम्र और इतिहास को लेकर विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
फिलहाल प्रशासन का प्राथमिक फोकस सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और कुएं के आसपास किसी भी संभावित खतरे को रोकने पर है।


