नई दिल्ली/कानपुर: रूस में फंसे एक भारतीय इंजीनियर को लेकर उसकी पत्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में स्नेहा गुप्ता ने दावा किया कि उनके पति चंदन गुप्ता को मॉस्को पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल में डाल दिया है और उन पर रूसी सेना में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है।
स्नेहा का दावा है कि उनके पति किसी काम के सिलसिले में रूस गए थे और उनके पास काम से संबंधित वर्क वीजा था। उनका आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद परिस्थितियां ऐसी बनीं कि चंदन को कथित तौर पर रूसी सेना में शामिल होने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। ऐसे में मामले में आधिकारिक रूसी या भारतीय पक्ष की पुष्टि और आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
PM मोदी और CM योगी से लगाई मदद की गुहार
वायरल वीडियो में स्नेहा गुप्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपने पति को सुरक्षित भारत वापस लाने में मदद करने की अपील करती नजर आ रही हैं।
स्नेहा के मुताबिक, उनके पति चंदन गुप्ता उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं और पेशे से इंजीनियर हैं। वह नोएडा के सेक्टर-62 स्थित एक कंपनी के लिए काम करते हैं। स्नेहा का कहना है कि कंपनी ने काम के सिलसिले में उन्हें रूस भेजा था और उनके पास वर्क वीजा था।
महिला का दावा है कि 6 सितंबर को दोपहर करीब 12:30 बजे मॉस्को पुलिस ने चंदन को हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें जेल भेजे जाने की बात कही गई है।

‘पति ने रूसी सेना जॉइन करने से इनकार किया’
स्नेहा ने वीडियो में आरोप लगाया कि उनके पति पर रूसी सेना में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था। उनके मुताबिक, चंदन ने सेना में शामिल होने से इनकार किया, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
महिला का दावा है कि उनके पति ने कोई अपराध नहीं किया है और इसके बावजूद उन्हें जेल में रखा गया है। उन्होंने भारत सरकार से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और अपने पति की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराने की अपील की है।
यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब रूस में भारतीय नागरिकों के सेना से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है। हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं और किसी व्यक्ति को सेना में शामिल किए जाने या हिरासत में लिए जाने के कारणों की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
रूसी भाषा नहीं समझ पाने से बढ़ी परेशानी
स्नेहा ने अपनी आपबीती सुनाते हुए भाषा की समस्या का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि उन्हें रूसी भाषा नहीं आती, जिसकी वजह से वह पुलिस और वकील की बातचीत को पूरी तरह समझ नहीं पा रही हैं।
उन्होंने कहा कि इसी कारण उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही कि उनके पति को किस आधार पर हिरासत में लिया गया है और वर्तमान में उनके साथ क्या प्रक्रिया चल रही है।
विदेशी देश में कानूनी प्रक्रिया और भाषा की बाधा किसी परिवार के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। स्नेहा ने इसी परेशानी का हवाला देते हुए भारत सरकार से राजनयिक स्तर पर मदद की अपील की है।
10 साल का बेटा भी परेशान, पत्नी ने सुनाई भावुक आपबीती
वीडियो में स्नेहा अपने पति के बारे में बात करते हुए भावुक भी नजर आईं। उन्होंने बताया कि उनके 10 साल का बेटा भी पिता के जेल में होने को लेकर परेशान है।
स्नेहा का कहना है कि परिवार इस समय बेहद मुश्किल स्थिति से गुजर रहा है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए कहा कि सरकार उनके पति के मामले में हस्तक्षेप करे और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने में सहायता करे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस कंपनी के काम के सिलसिले में उनके पति रूस गए थे, उसकी ओर से भी परिवार को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।
भारत-रूस संबंधों के बीच सामने आया मामला
भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक और कूटनीतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग है। ऐसे में किसी भारतीय नागरिक के रूस में कथित तौर पर फंसने या सैन्य भर्ती से जुड़े आरोप सामने आने पर मामला संवेदनशील हो जाता है।
इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि चंदन गुप्ता को किस कानूनी आधार पर हिरासत में लिया गया है, क्या उन पर कोई मामला दर्ज किया गया है और क्या वास्तव में उन्हें रूसी सेना में शामिल होने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा।
परिवार को भारत सरकार से बड़ी उम्मीद
स्नेहा गुप्ता की अपील के बाद परिवार की नजर अब भारतीय अधिकारियों की संभावित कार्रवाई पर है। परिवार चाहता है कि भारतीय दूतावास और संबंधित अधिकारी मामले की जानकारी लेकर चंदन की कानूनी स्थिति स्पष्ट करें।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में रूसी अधिकारियों या भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से इस विशेष मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए स्नेहा के दावों और वास्तविक कानूनी स्थिति के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक जानकारी का इंतजार जरूरी है।


