सीतापुर/उत्तर प्रदेश: कुछ सपने ऐसे होते हैं जिन्हें उम्र, परिवार और जिम्मेदारियों के बीच भी दिल से अलग नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की 43 वर्षीय शिवानी मेहरोत्रा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। 18 साल की बेटी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने पहाड़ों पर चढ़ने के अपने जुनून को जिंदा रखा और आखिरकार 15 अगस्त 2026 को रूस के माउंट एलब्रुस की 5,642 मीटर ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर एक यादगार उपलब्धि हासिल की।
यह सिर्फ एक पर्वत की चोटी तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि उस हौसले की कहानी है, जिसने रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच एक पुराने सपने को मरने नहीं दिया।
15 अगस्त की सुबह एलब्रुस पर लहराया तिरंगा
15 अगस्त की रात शिवानी और उनकी टीम ने माउंट एलब्रुस के शिखर की ओर अंतिम चढ़ाई शुरू की। अंधेरा, बेहद कम तापमान, बर्फीली हवाएं और ऊंचाई के साथ कम होती ऑक्सीजन ने रास्ते को मुश्किल बना दिया था।
कई घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद करीब साढ़े चार घंटे में शिवानी शिखर तक पहुंचीं। वहां तापमान करीब माइनस 15 से 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास था। चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर और तेज हवाओं के बीच जब शिवानी ने भारतीय तिरंगा फहराया, तो यह उनके लिए बेहद भावुक और गर्व का क्षण था।
खास बात यह रही कि जिस दिन भारत अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, उसी दिन रूस के काकेशस क्षेत्र में स्थित एलब्रुस की चोटी पर भी तिरंगा लहरा रहा था।
18 साल की बेटी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच जुनून
शिवानी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की रहने वाली हैं। 24 साल की उम्र में उनकी शादी हुई और बाद में वह परिवार के साथ मुंबई में रहने लगीं। पेशे से योग शिक्षिका शिवानी फिटनेस को लेकर भी लगातार सक्रिय रही हैं।
उनकी 18 साल की बेटी है। परिवार और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच पर्वतारोहण जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र के लिए समय निकालना आसान नहीं था। इसके बावजूद शिवानी ने अपने जुनून को खत्म नहीं होने दिया।
उनके इस सफर में माता-पिता, पति, बेटी और दोस्तों का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। शिवानी की कहानी का एक खास पहलू यह भी है कि उन्होंने अपने पर्वतारोहण अभियानों का बड़ा हिस्सा अपनी मेहनत की कमाई और बचत से पूरा किया।
2019 में शुरू हुआ था पहाड़ों का सफर
शिवानी का पर्वतारोहण से जुड़ाव वर्ष 2019 में शुरू हुआ। उस समय उन्होंने एक दोस्त के साथ माउंट एवरेस्ट बेस कैंप जाने की योजना बनाई थी। यही यात्रा उनके लिए पहाड़ों की दुनिया से जुड़ने की शुरुआत बनी।
इसके बाद उन्होंने कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में ट्रेकिंग की। धीरे-धीरे ट्रेकिंग का यह शौक ऊंची चोटियों की चुनौती में बदलता गया।
उन्होंने फ्रेंडशिप पीक पर भी चढ़ाई की। इसके बाद वर्ष 2026 की शुरुआत में उन्होंने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो को फतह किया। इसके अलावा कैलाश से जुड़े पांच प्रमुख ट्रेक में से चार को पूरा करने की उपलब्धि भी उनके नाम बताई जाती है।

एलब्रुस फतह करने के लिए महीनों की तैयारी
माउंट एलब्रुस की चढ़ाई केवल अंतिम कुछ घंटों की मेहनत नहीं थी। इसके लिए शिवानी और उनकी टीम ने कई दिनों तक ऊंचाई के अनुरूप खुद को तैयार किया।
10 दिन के अभियान के दौरान टीम ने पहले करीब 3,000 मीटर, फिर 4,000 मीटर और 4,700 मीटर तक चढ़ाई की। इसका उद्देश्य शरीर को कम ऑक्सीजन और पतली हवा वाले वातावरण के अनुकूल बनाना था।
टीम ने आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए आत्म-बचाव तकनीकों का अभ्यास भी किया। पहाड़ों पर मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए अभियान में एक अतिरिक्त दिन भी रिजर्व रखा गया था, ताकि खराब मौसम की स्थिति में शिखर अभियान को आगे बढ़ाया जा सके।
एक उपलब्धि, जो दूसरे सपनों को भी हौसला देती है
शिवानी की कहानी सिर्फ पर्वतारोहण की उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यह उन लोगों के लिए भी संदेश है, जो परिवार, नौकरी और दूसरी जिम्मेदारियों के कारण अपने सपनों को पीछे छोड़ देते हैं।
उन्होंने दिखाया कि जिम्मेदारियां निभाना और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। इसके लिए जरूरत है सही योजना, अनुशासन, लगातार मेहनत और परिवार के सहयोग की।
43 वर्ष की उम्र में 5,642 मीटर ऊंचे एलब्रुस पर तिरंगा फहराने वाली शिवानी ने यह भी साबित किया कि किसी लक्ष्य के लिए उम्र को अंतिम सीमा मान लेना जरूरी नहीं है।
युवाओं और महिलाओं के लिए शिवानी की कहानी से सीख
पहली सीख: उम्र को अपने सपनों के रास्ते की दीवार न बनने दें।
दूसरी सीख: जुनून के साथ अनुशासन और नियमित तैयारी जरूरी है।
तीसरी सीख: परिवार की जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अपने सपनों के लिए समय निकालने की कोशिश भी की जा सकती है।
चौथी सीख: बड़े लक्ष्य छोटे-छोटे कदमों और लगातार मेहनत से हासिल होते हैं।


