बाराबंकी। रक्षाबंधन के त्योहार पर घर जाने की जल्दी और महिलाओं के लिए मुफ्त रोडवेज यात्रा की सुविधा ने बाराबंकी बस स्टेशन की तस्वीर बदल दी। त्योहार से एक दिन पहले गुरुवार को बस अड्डे पर सामान्य दिनों की तुलना में करीब चार गुना ज्यादा यात्रियों की भीड़ पहुंच गई। यात्रियों की संख्या इतनी बढ़ गई कि बसों में जगह कम पड़ने लगी और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
प्रदेश सरकार की ओर से रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को करीब 64 घंटे तक रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जा रही है। महिला यात्रियों के साथ एक सहयात्री को भी मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलने से बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की ओर रवाना होने के लिए बस स्टेशन पहुंचे।
बसों की कमी से तीन से चार घंटे इंतजार
बाराबंकी डिपो की 114 बसें 29 अलग-अलग रूटों पर संचालित हो रही हैं। इसके बावजूद गुरुवार सुबह से ही यात्रियों की संख्या इतनी बढ़ गई कि बसों की उपलब्धता कम पड़ गई।
बस स्टेशन के अंदर यात्रियों के बैठने के लिए लगाई गई कुर्सियां पूरी तरह भर गईं। बड़ी संख्या में यात्रियों को बस अड्डे के बाहर और आसपास खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ा। तेज धूप के बीच बच्चों और सामान के साथ खड़े यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई।
कई यात्रियों का कहना था कि उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए तीन से चार घंटे तक बस का इंतजार करना पड़ा।
बस आते ही सीट के लिए मची होड़
सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों को हुई। जैसे ही कोई बस स्टेशन पर पहुंचती, यात्री सीट पाने के लिए उसकी ओर दौड़ पड़ते।
कई मौकों पर यात्रियों के उतरने से पहले ही दूसरे यात्री बस में चढ़ने की कोशिश करते दिखाई दिए। इससे बस के दरवाजे पर धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई।
त्योहारी भीड़ में सबसे बड़ी चुनौती बच्चों और बुजुर्गों को बस में सुरक्षित तरीके से चढ़ाना रही। परिवारों को सामान के साथ भीड़ के बीच रास्ता बनाने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस को संभालना पड़ा मोर्चा
बस स्टेशन पर लगातार बढ़ रही भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने तीन पुलिस टीमें तैनात कर दीं।
पुलिसकर्मी बस स्टेशन के अंदर और बाहर व्यवस्था संभालने में जुटे रहे। यात्रियों को लाइन में लगाने, बसों में व्यवस्थित तरीके से चढ़ाने और भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया।
हालांकि, यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती रहने के कारण पुलिस की मौजूदगी के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी। यात्रियों को बसों के लिए इंतजार करना पड़ता रहा।
‘दो बसें भरकर निकल गईं, फिर भी जगह नहीं मिली’
सीतापुर निवासी पूजा वर्मा ने बताया कि वह सुबह से बस का इंतजार कर रही हैं। उनके मुताबिक, दो बसें यात्रियों से भरकर निकल चुकी हैं, लेकिन उन्हें जगह नहीं मिल सकी। उन्होंने बताया कि उन्हें भाई को राखी बांधने के लिए घर पहुंचना है, इसलिए वह इंतजार कर रही हैं।
फतेहपुर निवासी रामकुमार ने भी बसों में भीड़ को लेकर परेशानी बताई। उन्होंने कहा कि वह करीब तीन घंटे से बस स्टेशन पर बैठे हैं। बस आते ही इतनी भीड़ हो जाती है कि बच्चों और बुजुर्गों के साथ बस में चढ़ना मुश्किल हो जाता है।
लखनऊ जाने वाली यात्री शबनम ने मुफ्त यात्रा की सुविधा को अच्छा कदम बताया, लेकिन साथ ही बसों की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ धूप में घंटों इंतजार करना काफी मुश्किल हो रहा है।
वहीं बुजुर्ग यात्री शिवकुमार का कहना था कि रक्षाबंधन पर हर व्यक्ति अपने घर पहुंचना चाहता है। ऐसे में अगर बसों की संख्या और बढ़ाई जाती तो यात्रियों को घंटों इंतजार नहीं करना पड़ता।
मुफ्त यात्रा के बीच क्षमता बढ़ाने की चुनौती
रक्षाबंधन पर मुफ्त यात्रा की सुविधा का उद्देश्य महिलाओं को त्योहार के दौरान अपने मायके और परिवार तक आसानी से पहुंचने में मदद करना है। लेकिन सुविधा शुरू होने के साथ यात्रियों की संख्या में अचानक हुई बढ़ोतरी ने परिवहन व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।
बाराबंकी बस स्टेशन पर सामने आई स्थिति से साफ है कि त्योहारों के दौरान केवल मुफ्त यात्रा की सुविधा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यात्रियों की संभावित संख्या के अनुसार अतिरिक्त बसों और बेहतर भीड़ प्रबंधन की भी जरूरत होती है।
त्योहार के दौरान यात्रियों की आवाजाही बढ़ने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में आने वाले घंटों में बस स्टेशनों पर भीड़ को नियंत्रित करना और यात्रियों को समय पर उनके गंतव्य तक पहुंचाना प्रशासन और रोडवेज के लिए बड़ी चुनौती होगी।


