Tuesday, October 3, 2023

Kanjhawala Case: ना टाइम पर पोस्टमॉर्टम न मेडिकल किसे बचा रही पुलिस

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Kanjhawala Case: दिल्ली के कंझावला केस में अंजलि की प्राइमरी पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट सामने आई है, जिसके मुताबिक रेप या सेक्शुअल असॉल्ट के सबूत नहीं मिले हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद पुलिस की कार्रवाई और कहानी अब भी सवालों के घेरे में है।
एक CCTV फुटेज सामने आया है, जिसमें अंजलि और उसकी दोस्त निधि एक OYO होटल के बाहर नजर आ रही हैं। दोनों लड़कियां स्कूटी से निकल रही हैं और तीन लड़के पास में खड़े हैं, इनमें से एक लड़का अंजलि से बात भी कर रहा है।ये होटल अंजलि के घर से सिर्फ 2.5 किलोमीटर दूर बुध विहार, सेक्टर-23 में है। अंजलि की मां ने दावा किया था कि वो काम के लिए घर से निकली थी और देर रात 4 बजे आने के लिए कहा था। सुबह 8 बजे पुलिस ने मां को फोन कर हादसे के बारे में बताया, सवाल ये है कि जब 4 बजे अंजलि घर नहीं लौटी तो मां ने उसे फोन क्यों नहीं किया। दूसरी तरफ छानबीन में सामने आया है कि अंजलि अपनी दोस्त के साथ न्यू-ईयर पार्टी करने होटल गई थी। होटल के मैनेजर ने पुलिस को बताया है कि लड़कियों की किसी बात पर दोस्तों से लड़ाई हो गई थी, बाद में उनकी आपस में भी लड़ाई हुई और फिर होटल स्टाफ ने उन्हें जाने के लिए कहा था।

अंजलि के दोस्त कौन थे, निधि कहां गायब थी

इस वीडियो के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस ने उस रात होटल में मौजूद अंजलि के दोस्तों की तलाश क्यों नहीं की। CCTV फुटेज में नजर आ रहा है कि अंजलि की स्कूटी के पीछे-पीछे ही ये लड़के भी बाइक से निकले थे।
एक सवाल ये भी है कि दूसरी लड़की जिसका नाम निधि है, एक्सीडेंट के बाद भाग क्यों गई, उसने किसी को कुछ बताया भी नहीं और सामने भी नहीं आई। एक्सीडेंट के बाद ये लड़की घर कैसे पहुंची, आखिर पुलिस उसे करीब 60 घंटों तक क्यों नहीं ढूंढ पाई। अब जब निधि सामने आई है तो वो अंजलि के भी शराब के नशे में होने की बात कह रही है। क्या ये केस को कमजोर करने की कोई साजिश है? CCTV में नजर आया है कि स्कूटी से लौटने से पहले ही सड़क पर दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ था।

निधि ने बताया-

टक्कर के बाद गाड़ी के नीचे अंजलि का पैर या कुछ फंस गया था, वो गाड़ी के नीचे से निकल ही नहीं पाई। जो लोग गाड़ी चला रहे थे उन्होंने दो-तीन बार गाड़ी को आगे पीछे किया, अंजलि चिल्ला रही थी, लेकिन उन लोगों ने नहीं सुना। उन लोगों ने भी शराब पी रखी थी। वो लोग कार आगे ले गए। मैं डर गई थी, इसलिए बस घर जाकर मां को सब बताया।निधि के इस बयान से आरोपियों की मुश्किलें भी बढ़ने वाली हैं। इससे पता चल रहा है कि आरोपियों ने अंजलि को देख लिया था, जब उन्होंने देखा तब वो जिंदा थी। इसके बावजूद उन्होंने बचने के लिए उसे न सिर्फ कई बार कुचला, बल्कि उसके बाद 14 किलोमीटर तक उसे घसीटा भी। यही अंजलि की मौत की वजह भी बनी।

पुलिस की लचर कार्रवाई आरोपियों को फायदा न मिल जाए

इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस पर तो कई बड़े सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरोपियों ने शराब पीकर एक लड़की को कुचल दिया। लड़की की लाश को 14 किलोमीटर तक गाड़ी के नीचे घसीटते रहे, लेकिन न कोई पुलिस नाका पड़ा और न ही किसी दिल्ली पुलिस पेट्रोल टीम को वे नजर आए। ये हादसा 31 दिसंबर और 1 जनवरी की दरमियानी रात हुआ, पुलिस का दावा था कि वे सबसे ज्यादा अलर्ट थे। पुलिस ने जो FIR दर्ज की है, वो भी काफी लचर बताई जा रही है, आरोपियों पर 304 (गैर इरादतन हत्या), 304-A (लापरवाही से मौत), 279 (रैश ड्राइविंग) और 120-बी (आपराधिक साजिश) जैसी धाराएं लगाई गई हैं।

इस मामले में दिल्ली पुलिस के रवैये में नजर आती हैं 8 बड़ी कमियां

1. नए साल के पहले वाली शाम को दिल्ली छावनी में बदल जाती है। इस दिन गश्त, नाकाबंदी पूरी चुस्ती के साथ की जानी चाहिए। जगह-जगह पर चेकिंग पोस्ट लगाकर शराब पीने वालों को कंट्रोल में रखा जाता है। एक गाड़ी के नीचे लड़की की लाश 14 किमी तक घिसटती रही, लेकिन पुलिस को इसकी भनक कैसे नहीं लगी। पुलिस न्यू ईयर की रात इतनी ढीली कैसे हो सकती है?

2. चश्मदीद गवाह दीपक ने पुलिस को 22 बार कॉल किया, कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस की गश्ती करने वाली PCR गाड़ी सामने से गुजरी और आवाज देने के बावजूद नहीं रुकी। दूसरे चश्मदीद को भी पुलिस ने कहा- जाओ अपना काम करो।चश्मदीद से पुलिस ने खुद संपर्क नहीं किया, बल्कि मीडिया में खबर आई तब उसने खुद पुलिस के पास जाकर घटना के बारे में बताया। क्या पुलिस ने रात से लेकर सुबह तक चश्मदीदों को ढूंढने की कोशिश नहीं की?

3. दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने बिना पोस्टमॉर्टम के कह दिया कि एक्सीडेंट से मौत हुई है। आरोपियों ने बताया कि गाड़ी में तेज म्यूजिक चल रहा था, पुलिस ने उसे सच मान भी लिया। सच तो ये है कि अगर कार के नीचे एक पानी की बोतल भी आ जाए, तब भी ड्राइवर को महसूस होता है कि कुछ अटपटा है। पुलिस प्रवक्ता ने आरोपियों के बचाव पक्ष के वकील की तरह पैरवी की। पुलिस को पीड़िता के पक्ष की शिकायत के आधार पर जांच करनी होती है।

4. पुलिस को आरोपियों का एल्कोहॉलिक टेस्ट तत्काल कराना चाहिए था। टेस्ट के रिजल्ट और आरोपियों के बयान से मैच करके केस को समझना चाहिए था। हालांकि, ये टेस्ट 80 घंटे तक किया जा सकता है, लेकिन इतने गंभीर केस में पुलिस ने ढिलाई क्यों बरती? पुलिस ने लड़की का पोस्टमॉर्टम करीब 36 घंटे बाद किया। एक इतना गंभीर केस में पुलिस का इतना ढीला रवैया समझ से परे है। क्यों नहीं भेजा गया पुलिस को इसका जवाब देना चाहिए?

5. क्राइम या एक्सीडेंट के स्पॉट की पुलिस ने बाड़ेबंदी नहीं की। दूसरे दिन आम लोग और मीडिया वालों ने क्राइम स्पॉट को रौंद दिया। इससे काफी अहम एविडेंस नष्ट हो जाने की आशंका हैं। पुलिस को तत्काल फॉरेंसिक टीम से घटनास्थल से सबूत जुटाने चाहिए थे।

6. पुलिस ने शुरुआत में सिर्फ और सिर्फ एक्सीडेंट की धाराएं लगाईं। इसके बाद किस्तों में 304A, 120B की धाराएं लगाईं। पीड़िता की मां ने रेप का शक जताया तो पुलिस ने रेप की धारा केस में क्यों नहीं जोड़ी। अगर पोस्टमॉर्टम में ये गलत निकल जाती तो बाद में जांच में ये धाराएं हटा ली जातीं। पुलिस ने पीड़िता की मां के बयान के आधार पर केस में कार्रवाई क्यों नहीं की? पुलिस की ये एकपक्षीय कार्रवाई साफ दिखाती है कि थाने के स्तर पर आरोपियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।

7. पुलिस ने जो FIR सार्वजनिक की है वो एक रनिंग कमेंट्री जैसी है। जबकि पुलिस को तब तक पता चल चुका था कि आरोपी कौन हैं। पुलिस को FIR लड़की के पक्ष से लिखनी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि FIR कोई एनसाइक्लोपीडिया नहीं होती है। पुलिस को घटनाक्रम की सही जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए, जिससे बाद में केस ठीक से चल सके।

8. हादसे के बारे में पुलिस को पता चलने के कई घंटों बाद तक लड़की की मां और परिवारवालों को नहीं बताया गया कि उनकी बेटी के साथ क्या हुआ है। पीड़ित पक्ष को ‘राइट टु नो’ और ‘नीड टु नो’ दोनों अधिकार हैं। ये पुलिस की जिम्मेदारी है कि पीड़िता की मां को जल्दी से जल्दी हादसे/अपराध के बारे में सूचना दी जाए। उन्हें शव देखने का भी अधिकार था।

आरोपियों को गाड़ी के नीचे बॉडी का पता नहीं चला ये नामुमकिन

14 किमी तक आपकी गाड़ी के नीचे कोई बॉडी घिसटती है और कार में बैठे लोगों को इसका पता नहीं चला, ये तो पॉसिबल ही नहीं है। मतलब ये डेलिबरेट है। दूसरा अगर ये माना भी जाए कि उन्हें नहीं पता चला तो फिर वो शराब के इतने नशे में थे कि उन्हें होश नहीं था। तब भी ये मामला डेलिबरेट है। अगर इस सब का सबूत होने के बाद भी पुलिस कोर्ट में 304A का मुकदमा डाले तो कोर्ट के पास पावर है कि वो इसे 304 के केस में बदल दें। इस धारा में जुर्म साबित होने पर 14 साल तक की सजा हो सकती है।

पुलिस सवालों के घेरे में, ढीली कार्रवाई से केस कमजोर हुआ

अभी ये कहना मुश्किल है कि पुलिस ने ठीक से काम नहीं किया है। सबसे बड़ा सवाल ये ही है कि PCR पर उनको बार-बार फोन किए गए, अगर वो उठा लेते तो ये एक्सीडेंट की घटना रोकी जा सकती थी। आरोपी लड़की को 14 किमी तक घसीटते रहे, इसमें करीब 1 घंटा तो लगा ही होगा। ऐसे में अगर पुलिस पहले कहीं इंटरफेयर कर देती तो शायद लड़की को बचाया जा सकता था। फिलहाल पुलिस ने CCTV फुटेज तो निकाल ही लिए हैं। बॉडी का पोस्टमॉर्टम भी करवा रहे हैं। FIR में 15 घंटे की और पोस्टमॉर्टम में 36 घंटे की देरी भी पुलिस पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। इस देरी का जांच पर निगेटिव इंपेक्ट होता है। पुलिस से पहले तो मीडिया को सब पता था। घटना रात 2 बजे के आसपास हुई। लड़की की मां ने बताया कि घटना के बाद सुबह 8 बजे पुलिस का फोन आया, लेकिन मौत की जानकारी दोपहर 1 बजे के आसपास दी, इसके पहले घुमाते रहे। किसी भी तरह की देरी शक पैदा करने वाली है, पुलिस पर शक बढ़ाती है।

सेक्शुअल असॉल्ट एंगल से भी जांच जरूरी

पोस्टमॉर्टम में सेक्शुअल असॉल्ट न आने से ये मान लेना गलत है कि इस बारे में छानबीन न की जाए। क्या पता इन लड़कों से लड़की के संबंध रहे हों और कोई झगड़ा ही इस क्रूरता की वजह बना। अभी केस ओपन है तो इन्वेस्टिगेशन सबसे जरूरी है। कई मामलों में ये असॉल्ट उस घटना में नहीं होता, लेकिन उसकी वजह यही होती है। इस मामले में अभी FSL रिपोर्ट का भी इंतजार है, उससे भी चीजें और साफ होंगी।
मुंबई के एलिस्टर परेरा के केस में भी 304A नहीं 304 लगा था, क्योंकि उस केस में आरोपी नशे में था तो कोर्ट में यही सवाल उठा था कि ऐसे में उसने गाड़ी क्यों चलाई। ये तो जानबूझकर किया गया हुआ न। (2006 में एलिस्टर परेरा नाम के शख्स ने कार से सात लोगों को कुचल दिया था।) इस केस में अगर आरोपियों के मेडिकल टेस्ट में अल्कोहल आए और पुलिस ने सेक्शंस बदलने की अर्जी न लगाए तो इस पर सवाल होना चाहिए।

अंजलि की मौत के 5 आरोपी

1. दीपक खन्ना, उम्र 26 साल, ग्रामीण सेवा में ड्राइवर 2. अमित खन्ना, उम्र 25 साल, उत्तम नगर में SBI कार्ड्स के लिए काम करता है 3. कृष्ण, उम्र 27 साल, कनॉट प्लेस में स्पेनिश कल्चर सेंटर में काम करता है 4. मिथुन, उम्र 26 साल, नरेला में हेयर ड्रेसर 5. मनोज मित्तल, उम्र 27 साल, पी ब्लॉक सुल्तानपुरी में राशन डीलर, BJP नेता

सहेली का दावा- नशे में गाड़ी चला रही थी अंजलि सिर-रीढ़ पर चोट से मौत

कंझावला हिट एंड रन केस में अंजलि के सिर-रीढ़ और शरीर के निचले हिस्से पर गंभीर चोटें लगने से मौत की बात सामने आई है। उधर, अंजलि की दोस्त निधि ने पुलिस को दिए बयान में हादसे की वजह कार सवारों की गलती को बताया है। उसने अंजलि के नशे में होने का भी दावा किया है। निधि ने कहा कि अंजलि बहुत नशे की हालत में थी। मैंने उसे कहा था कि मुझे स्कूटी चलाने दे लेकिन उसने मुझे स्कूटी चलाने नहीं दी। कार से टक्कर हुई, उसके बाद मैं एक तरफ गिर गई और वो कार के नीचे आ गई। कार के नीचे वह किसी चीज में अटक गई और कार उसे घसीटते हुए ले गई। मैं डर गई थी इसलिए वहां से चली गई और किसी को कुछ नहीं बताया।

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