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अमेरिका के बायकॉट के बावजूद G20 घोषणापत्र पारित, साउथ अफ्रीका ने नहीं मानी ट्रम्प की मांग; आज खाली कुर्सी को सौंपी जाएगी मेजबानी

G20 समिट के पहले दिन सर्वसम्मति से घोषणापत्र पारित, अमेरिका के बहिष्कार के कारण 2026 की अध्यक्षता ‘खाली कुर्सी’ को सौंपी जाएगी

अमेरिकी राष्ट्रपति: डोनाल्ड ट्रम्प के बायकॉट के बावजूद 20वीं G20 समिट के पहले दिन शनिवार को एक बड़ा फैसला लिया गया। सदस्य देशों ने साउथ अफ्रीका द्वारा तैयार किए गए घोषणापत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी।

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा कि—
“घोषणापत्र पर सभी देशों का सहमत होना अत्यंत आवश्यक था, भले ही अमेरिका ने इसमें हिस्सा नहीं लिया।”

समिट के दौरान अमेरिका ने कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा। ट्रम्प ने अंतिम सत्र में मेजबानी स्वीकार करने के लिए एक अमेरिकी अधिकारी भेजने की इच्छा जताई थी, लेकिन साउथ अफ्रीका ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

अब राष्ट्रपति रामफोसा आज G20 की 2026 की मेजबानी प्रतीकात्मक रूप से ‘खाली कुर्सी’ को सौंपेंगे, क्योंकि अमेरिका की ओर से कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं है।


पहले दिन ही पास हुआ G20 घोषणापत्र — परंपरा टूटी

आमतौर पर G20 समिट के अंत में घोषणापत्र पारित होता है, लेकिन इस वर्ष परंपरा बदलते हुए इसे पहले ही दिन मंजूरी दे दी गई।
अमेरिका के बायकॉट और राजनीतिक तनावों को देखते हुए साउथ अफ्रीका ने यह कदम उठाया ताकि किसी विवाद की स्थिति न बने।


मोदी-रामफोसा की द्विपक्षीय वार्ता

PM मोदी ने रविवार को G20 शिखर सम्मेलन से इतर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा से मुलाकात की।

मोदी ने बताया—
“कल G20 बैठक के पहले दो सत्र काफी उपयोगी रहे। मैंने कई वैश्विक मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया।”


IBSA बैठक में भारत, ब्राजील और साउथ अफ्रीका एकजुट

G20 समिट के दौरान PM मोदी IBSA (India-Brazil-South Africa) मीटिंग में शामिल हुए।

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा और साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति रामफोसा भी बैठक में मौजूद रहे।

2003 के ब्रासीलिया घोषणापत्र से शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म तीनों देशों के बीच सहयोग का प्रमुख स्तंभ है।


G20 के दो सत्रों में मोदी के संबोधन

PM मोदी ने पहले सत्र में वैश्विक चुनौतियों और विकास मॉडल की खामियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा—

“पुराने विकास मॉडल ने संसाधनों का असंतुलित दोहन किया है। अफ्रीकी देशों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक दिखता है। अब एक नए, न्यायपूर्ण मॉडल की जरूरत है।”

दूसरे सत्र में मोदी ने श्री अन्न (मोटा अनाज), जलवायु परिवर्तन, उपग्रह डेटा साझेदारी और डिजास्टर जोखिम प्रबंधन पर बात की।


मोदी की तीन प्रमुख वैश्विक पहल

1. वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार

दुनिया भर के पारंपरिक ज्ञान, लोक चिकित्सा और समुदाय आधारित प्रथाओं को एक मंच पर लाने की पहल।

2. अफ्रीका स्किल इनिशिएटिव

अफ्रीका के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य।

3. ड्रग–टेरर नेक्सस के खिलाफ ग्लोबल फ्रेमवर्क

ड्रग तस्करी, हवाला नेटवर्क और आतंक फंडिंग से जुड़े सिस्टम को ध्वस्त करने की अंतरराष्ट्रीय पहल।


दिल्ली घोषणा-पत्र (2023) की सराहना

2023 के दिल्ली घोषणापत्र में महिला सशक्तिकरण, जलवायु फंडिंग और डिजिटल लिटरेसी पर सहमति बनी थी।
इस बार सदस्य देशों ने इसकी उपलब्धियों की समीक्षा की और इसे आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

UNSC विस्तार और भारत को स्थायी सदस्यता देने के प्रस्ताव को भी समर्थन मिला।


दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं पर हिंसा के खिलाफ उबाल

G20 के आयोजन से पहले साउथ अफ्रीका में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए।
लगातार विरोध के बाद सरकार ने महिलाओं पर अत्याचार को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया।

काले कपड़े पहनकर हजारों महिलाओं ने 15 मिनट तक जमीन पर लेटकर शांतिपूर्ण विरोध जताया।


G20 के खिलाफ भी कई विरोध प्रदर्शन

जलवायु परिवर्तन, गरीबी और बेरोजगारी के मुद्दों पर एक्टिविस्ट संगठनों ने G20 के समानांतर एक अलग समिट आयोजित की।

व्हाइट अल्पसंख्यक समूह और एंटी-इमिग्रेशन संगठनों ने भी अलग-अलग प्रदर्शन किए।


G20 की उत्पत्ति — क्यों बना यह समूह?

1997–98 के एशियाई आर्थिक संकट के बाद G7 देशों ने महसूस किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का संचालन केवल 7 विकसित देशों से संभव नहीं है।
भारत, चीन, ब्राजील जैसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं को शामिल करना आवश्यक था।

इस तरह 1999 में G20 का गठन हुआ और 2008 से इसमें राष्ट्राध्यक्षों की भागीदारी शुरू हुई।

News Desk

Written by News Desk

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