महाराष्ट्र: की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की खबर ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिवसेना विधायक प्रताप सारनाईक ने दावा किया है कि उद्धव गुट के छह सांसद औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को आवश्यक पत्र भी सौंप दिया है।
यदि यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत काफी बढ़ जाएगी और उद्धव गुट की स्थिति कमजोर हो सकती है।
आदित्य ठाकरे का तीखा हमला
इस राजनीतिक हलचल के बीच उद्धव ठाकरे के बेटे और शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने साबित कर दिया है कि उनकी वफादारी बिकाऊ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता और लालच के कारण कुछ नेताओं ने रातोंरात अपना राजनीतिक रुख बदल लिया।
आदित्य ठाकरे की इस टिप्पणी के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी का दौर और तेज हो गया है।
लोकसभा में बदल जाएगा शक्ति संतुलन
वर्तमान स्थिति में लोकसभा में शिंदे गुट के सात सांसद हैं। यदि छह सांसद उनके साथ आते हैं तो यह संख्या बढ़कर 13 हो जाएगी।
दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के पास वर्तमान में नौ सांसद हैं। छह सांसदों के जाने के बाद यह संख्या घटकर केवल तीन रह जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव भविष्य की राजनीति और संगठनात्मक ताकत पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
कौन-कौन सांसद बताए जा रहे हैं बागी?
राजनीतिक गलियारों में जिन सांसदों के नाम चर्चा में हैं, उनमें संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय दीना पाटिल और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल बताए जा रहे हैं।
इन सांसदों ने हाल ही में आयोजित शिवसेना (UBT) की संसदीय दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। इसके बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं।
उद्धव ठाकरे का जवाबी अभियान
पार्टी में संभावित टूट के बीच उद्धव ठाकरे ने भी राजनीतिक मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने 27 जून से महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान शुरू करने का फैसला किया है।
कार्यक्रम के अनुसार वे उन लोकसभा क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे जहां से बागी सांसद चुने गए हैं। इस अभियान के जरिए उद्धव ठाकरे सीधे कार्यकर्ताओं और जनता से संवाद स्थापित करने की कोशिश करेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह अभियान संगठन को फिर से मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
बागी सांसद के बेटे पर कार्रवाई
इसी बीच शिवसेना (UBT) ने हिंगोली सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर के बेटे कृष्णा पाटिल अष्टीकर को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया है।
पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन विरोधी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि उद्धव गुट बगावत के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के मूड में है।
भाजपा पर फिर बरसे उद्धव ठाकरे
हाल ही में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने और उनके नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि शिवसेना ने अपने राजनीतिक सफर में कई चुनौतियों का सामना किया है और आगे भी पार्टी अपने सिद्धांतों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
फंड और विकास को बताया कारण
कुछ बागी सांसदों ने अपने फैसले के पीछे विकास कार्यों और संसाधनों की कमी को वजह बताया है।
उनका कहना है कि अपने निर्वाचन क्षेत्रों के विकास के लिए पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पा रहा था, जिसके कारण उन्हें यह निर्णय लेना पड़ा।
हालांकि उद्धव गुट इस तर्क को स्वीकार नहीं कर रहा और इसे केवल राजनीतिक अवसरवाद बता रहा है।


