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सऊदी में जजान अरामको रिफाइनरी पर बड़ा ड्रोन हमला! हूती विद्रोहियों ने ली जिम्मेदारी, आग लगने से बढ़ी चिंता

रियाद। सऊदी अरब के जजान में स्थित अरामको से जुड़ी एक औद्योगिक सुविधा में आग लगने के बाद मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने जजान स्थित सऊदी अरामको रिफाइनरी को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया है।

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उनके लड़ाकों ने जजान स्थित तेल प्रतिष्ठान पर ड्रोन से हमला किया। हूती पक्ष के अनुसार, यह कार्रवाई सऊदी अरब की ओर से उत्तर-पश्चिमी यमन में किए गए ड्रोन हमले के जवाब में की गई।

हालांकि, हमले को लेकर हूती विद्रोहियों के दावे और सऊदी अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी में अंतर है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने आग लगने की पुष्टि की है, लेकिन आग का कारण स्पष्ट रूप से नहीं बताया है।

सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने क्या कहा?

सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, जजान में सऊदी अरामको से संबंधित एक सुविधा के एक हिस्से में रविवार सुबह आग लग गई थी।

मंत्रालय ने बताया कि सऊदी अरामको की औद्योगिक सुरक्षा अग्निशमन टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है।

हालांकि, मंत्रालय ने आग लगने के पीछे किसी हमले या ड्रोन को आधिकारिक तौर पर कारण नहीं बताया। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रिफाइनरी में लगी आग हूती विद्रोहियों के कथित ड्रोन हमले का ही परिणाम थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

हूती प्रवक्ता ने क्या दावा किया?

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने अपने बयान में कहा कि सऊदी अरब के जजान स्थित अरामको प्रतिष्ठान को ड्रोन से निशाना बनाया गया।

हूती विद्रोहियों ने इसे जवाबी कार्रवाई बताया है। उनके अनुसार, उत्तर-पश्चिमी यमन में सऊदी अरब की ओर से किए गए ड्रोन हमले के बाद यह कार्रवाई की गई।

हूती लंबे समय से क्षेत्रीय संघर्ष में सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के खिलाफ हमले करते रहे हैं। तेल प्रतिष्ठानों और लाल सागर क्षेत्र से जुड़ी घटनाओं के कारण इन हमलों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी असर पड़ता है।

यमन के मोखा में भी धमाकों की खबर

जजान की घटना के अलावा यमन के मोखा शहर में भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबर सामने आई है। बंदरगाह के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों ने लगातार कई जोरदार धमाकों की आवाज सुनने की बात कही।

रिपोर्ट के मुताबिक, यमन की एयर डिफेंस ने इन हमलों का जवाब देने की कोशिश की। मोखा क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह लाल सागर के आसपास के समुद्री मार्गों के करीब स्थित है।

एक ही समय में सऊदी अरब और यमन से जुड़ी ऐसी घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

लाल सागर में क्यों बढ़ रही है चिंता?

मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव का असर लाल सागर के समुद्री मार्गों पर भी देखने को मिला है। इस क्षेत्र से होकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

व्यावसायिक जहाजों पर हमलों और क्षेत्र के तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं से ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को लेकर चिंता बढ़ती है। किसी बड़े तेल प्रतिष्ठान पर हमला होने की स्थिति में इसका असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भी पड़ सकता है।

जजान सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित है और यमन की सीमा के करीब होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।

2022 का युद्धविराम और फिर बढ़ता तनाव

यमन संघर्ष में 2022 के दौरान युद्धविराम की स्थिति बनी थी, जिससे हिंसा में कुछ कमी आई थी। हालांकि, क्षेत्रीय स्तर पर तनाव और अलग-अलग सैन्य घटनाओं के कारण स्थिति फिर से अस्थिर होती नजर आ रही है।

हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से संघर्ष का इतिहास रहा है। लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाए जाने और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों ने इस तनाव को और जटिल बना दिया है।

जजान की घटना ऐसे समय सामने आई है, जब मध्य पूर्व पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव का सामना कर रहा है।

सबसे बड़ा सवाल- क्या था हमले का असर?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जजान में आग पर काबू पा लिया गया है और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। लेकिन हूती विद्रोहियों द्वारा हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद घटना की गंभीरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अब निगाह इस बात पर है कि सऊदी अधिकारी घटना की विस्तृत जांच के बाद आग लगने की वजह को लेकर क्या जानकारी सामने रखते हैं। यदि आधिकारिक जांच में ड्रोन हमले की पुष्टि होती है, तो इससे सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

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