नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में हालिया फेरबदल के बाद मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में अहम बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने की। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 65 प्रभारी और सह-प्रभारी शामिल हुए।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पार्टी ने हाल ही में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारियों और सह-प्रभारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। इसलिए इसे नई संगठनात्मक टीम की पहली सामूहिक समीक्षा बैठकों में से एक माना जा रहा है।
संगठन विस्तार से लेकर चुनावी तैयारियों तक मंथन
बैठक में पार्टी संगठन को राज्यों में और मजबूत करने, जमीनी स्तर पर नेटवर्क का विस्तार करने और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारियों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठन की तैयारियों की समीक्षा भी एजेंडे में रही।
खास तौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे चुनावी राज्यों को लेकर संगठनात्मक तैयारियों पर ध्यान रहने की बात सामने आई है। उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि पंजाब में भी आगामी विधानसभा चुनाव पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि बैठक से जुड़े उपलब्ध विवरणों में किसी विशेष राज्य के लिए अंतिम चुनावी रणनीति या उम्मीदवारों से संबंधित कोई निर्णय घोषित होने की जानकारी नहीं है। इसलिए बैठक को फिलहाल संगठनात्मक समीक्षा और आगामी तैयारियों के संदर्भ में देखना अधिक उचित है।

हालिया फेरबदल के बाद पहली बड़ी सामूहिक बैठक
भाजपा ने 23 सितंबर को सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए थे। इसके बाद यह बैठक नई टीम के लिए केंद्रीय नेतृत्व के साथ पहली बड़ी सामूहिक बातचीत के रूप में सामने आई।
नए संगठनात्मक ढांचे में कई वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारियां दी गई हैं। उदाहरण के तौर पर स्मृति ईरानी को हरियाणा और छत्तीसगढ़ का प्रभार, राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड की जिम्मेदारी तथा विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। उत्तर प्रदेश के लिए उनके साथ कई सह-प्रभारियों की भी नियुक्ति की गई है।
इसी फेरबदल के तहत दिल्ली की जिम्मेदारी विनय सहस्रबुद्धे को दी गई है, जबकि जामयांग त्सेरिंग नामग्याल और दर्शना जरदोश को सह-प्रभारी बनाया गया है।
जमीनी संगठन को लेकर नितिन नबीन का संदेश
बैठक से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक नितिन नबीन ने संगठन के पदाधिकारियों को अपने-अपने राज्यों में अधिक समय देने और जमीनी स्तर पर संगठनात्मक काम को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पदाधिकारियों को अनावश्यक रूप से बार-बार दिल्ली आने के बजाय राज्यों में रहकर जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।
इसका सीधा संबंध पार्टी की उस संगठनात्मक व्यवस्था से है जिसमें राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी संबंधित राज्यों में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और स्थानीय संगठन के बीच समन्वय का काम करते हैं।
नेताओं की मौजूदगी ने बढ़ाई बैठक की अहमियत
बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोष सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों और राज्य प्रभारियों की मौजूदगी रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े, सुनील बंसल, स्मृति ईरानी, बिप्लब देब, हरीश द्विवेदी, संजय भाटिया, सतीश पूनिया और गजेंद्र पटेल समेत कई नेता बैठक में मौजूद रहे।
बैठक शुरू होने से पहले नितिन नबीन ने पार्टी मुख्यालय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीरों पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।
यूपी चुनाव 2027 के लिए संगठन पर बढ़ेगा फोकस?
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के संगठनात्मक कैलेंडर में प्रमुख घटनाओं में शामिल है। हाल के संगठनात्मक फेरबदल में उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी विनोद तावड़े को दी गई है और उनके साथ चार सह-प्रभारियों को लगाया गया है। ऐसे में राज्य संगठन, बूथ स्तर की तैयारियों और केंद्रीय नेतृत्व के साथ समन्वय पर आने वाले समय में ज्यादा जोर दिखाई दे सकता है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि मंगलवार की बैठक में उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर कोई अंतिम रणनीति तय हुई है। उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से संगठन विस्तार, चुनावी तैयारी और राज्यों में पार्टी के कामकाज की समीक्षा की ओर संकेत करती है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ भी चर्चा के एजेंडे में
बैठक से जुड़ी जानकारी में ‘सेवा संकल्प अभियान’ का भी उल्लेख सामने आया है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से जुड़ा है। संगठनात्मक बैठकों के जरिए पार्टी इस तरह के कार्यक्रमों को राज्यों और जमीनी स्तर तक ले जाने की तैयारियों पर भी चर्चा कर रही है।
कुल मिलाकर, नितिन नबीन की अध्यक्षता में हुई यह बैठक हालिया संगठनात्मक फेरबदल के बाद भाजपा की नई टीम के लिए महत्वपूर्ण समन्वय बैठक रही। इसमें तत्काल किसी एक चुनावी फैसले की घोषणा के बजाय संगठन को मजबूत करने, राज्यों में गतिविधियां बढ़ाने और आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियां आगे बढ़ाने पर फोकस दिखाई दिया।


