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लखनऊ में अंबेडकर के अस्थि कलश पर बवाल! RPI का सरकार को अल्टीमेटम, 9 अगस्त को महाआंदोलन की चेतावनी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर के अस्थि कलश को कथित रूप से हटाए जाने की आशंका को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि अस्थि कलश के स्थान से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या विस्थापन का प्रयास किया गया तो पूरे प्रदेश में आंदोलन तेज किया जाएगा।

RPI कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज चौराहे से विधानभवन के सामने स्थित बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अस्थि कलश स्थल तक विरोध मार्च निकालने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हुए थे और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके चलते कुछ देर तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान RPI नेताओं ने कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और सामाजिक न्याय के प्रतीक हैं। ऐसे में उनके अस्थि कलश से जुड़ी किसी भी धरोहर के साथ छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।

RPI प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता ने कहा कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो पार्टी प्रदेश के सभी 75 जिलों में विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 9 अगस्त को लखनऊ में एक बड़ा महाआंदोलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें हजारों कार्यकर्ता शामिल होंगे।

“आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पवन भाई गुप्ता ने कहा कि बाबासाहेब का अस्थि कलश करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इस ऐतिहासिक धरोहर को हटाने की कोशिश की गई तो इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए ताकि लोगों के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि अस्थि कलश को उसके वर्तमान स्थान पर सुरक्षित रखा जाए।

1991 से स्थापित है अस्थि कलश

RPI नेताओं के अनुसार, बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का अस्थि कलश वर्ष 1991 में विधानभवन के समीप स्थापित किया गया था। बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के कार्यकाल में वहां बाबासाहेब की प्रतिमा का भी अनावरण किया गया था।

पार्टी का कहना है कि यह स्थान केवल एक स्मारक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और संविधान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इसलिए इसके स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत कर सकता है।

पुलिस ने रोका विरोध मार्च

प्रदर्शन के मद्देनजर हजरतगंज क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। जैसे ही प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी प्रकार की हिंसा या तोड़फोड़ की सूचना नहीं मिली।

प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की थी ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

प्रदेशभर में चलेगा विरोध अभियान

RPI ने ऐलान किया कि पार्टी के कार्यकर्ता प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे। इसके माध्यम से सरकार से अस्थि कलश को यथास्थान सुरक्षित रखने की मांग की जाएगी।

पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि ज्ञापन देने के बाद भी सरकार ने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया तो 9 अगस्त को होने वाला आंदोलन राज्यव्यापी अभियान का रूप ले सकता है।

राजनीतिक और सामाजिक महत्व

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बाबासाहेब अंबेडकर से जुड़े मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहे हैं। ऐसे मामलों में किसी भी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई या अफवाह भी बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बन सकती है। इसलिए सरकार और प्रशासन दोनों इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

फिलहाल प्रशासन की ओर से अस्थि कलश को हटाने या स्थानांतरित करने को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं RPI अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुट गई है।

लखनऊ में बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अस्थि कलश को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन चुका है। RPI ने इसे आस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

News Desk

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